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Bihar election 2025 : मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट न देने पर बीजेपी का बड़ा बयान,कहा - हम इस तरह के प्रत्याशी ...

बिहार चुनाव 2025 में सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में बीजेपी द्वारा मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट न देने पर सियासत गर्माई। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा—"हम जीतने वाले प्रत्याशी उतारते हैं।"

08-Nov-2025 02:46 PM

By First Bihar

Bihar election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीति गरमा गई है। किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में कुल 24 विधानसभा सीटें हैं, जो राज्य की 243 सीटों का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है।


इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बीजेपी के बिहार प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि बीजेपी और उसके गठबंधन में मुस्लिम उम्मीदवार शामिल हैं। उन्होंने कहा, “हम जीतने के आधार पर प्रत्याशी उतारते हैं। हमारा गठबंधन समाज के सभी वर्गों, वंचितों और कमजोरों का संतुलन बनाकर उम्मीदवार तय करता है। हम किसी समुदाय से कितने प्रत्याशी होने चाहिए, इस गणना में नहीं पड़ते। हमारे एनडीए गठबंधन ने चार मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।”


हाल ही में बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विवादित बयान देते हुए कहा था, “जरूरत पड़ेगी तो बुर्का उठा कर भी देखेंगे, यह पाकिस्तान नहीं है, यहां शरिया लागू नहीं होता।” इस बयान पर जब धर्मेंद्र प्रधान से सवाल किया गया कि सीमांचल में मुस्लिम महिलाओं का वोट एनडीए को मिलेगा या नहीं, तो उन्होंने कहा, “किसी के बयान पर मत जाइए, चुनावी प्रक्रिया पर जाइए। मतदान केंद्रों पर पहचान पत्र और चेहरे का मिलान हमेशा से होता आया है। यह नई प्रक्रिया नहीं है।”


प्रधान ने आगे कहा, “मैंने टीवी पर मुस्लिम बहनों के इंटरव्यू देखे, उन्होंने कहा कि पहचान की प्रक्रिया में कोई आपत्ति नहीं है। यह कानूनी व्यवस्था है और इसमें कुछ गलत नहीं है। अगर मुस्लिम महिलाएं इसे सही मान रही हैं, तो मीडिया को क्यों आपत्ति है?”


सीमांचल में ‘घुसपैठ’ के मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह केवल सीमांचल नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है। उन्होंने कहा, “पड़ोसी देश के लोग बिहार, बंगाल, झारखंड, ओडिशा और देश के कई हिस्सों में बस रहे हैं। इनकी पहचान करना हमारा अधिकार है। हमारे देश के संसाधन यहां के नागरिकों के लिए हैं। अगर पड़ोसी देश के लोग आकर हमारे संसाधनों पर कब्जा करें तो यह देश के गरीबों के साथ अन्याय होगा।”


जब उनसे पूछा गया कि असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि “जब SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तब घुसपैठ का मुद्दा कहां से आता है?” तो धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब दिया, “SIR एक कानूनी प्रक्रिया थी, न कि राजनीतिक। जिन लोगों ने तब इसका विरोध किया, वही आज सवाल उठा रहे हैं। यह मुद्दा खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि सामाजिक अतिक्रमण अभी भी जारी है। सीमाओं की सुरक्षा जरूरी है और देश के संसाधनों पर केवल भारतीय नागरिकों का अधिकार होना चाहिए। दुनिया के हर देश में घुसपैठ एक गंभीर मुद्दा होता है, फिर भारत में इसे उठाना गलत कैसे हो सकता है?”


धर्मेंद्र प्रधान के इन बयानों से साफ है कि बीजेपी सीमांचल में भी “राष्ट्रीय सुरक्षा” और “घुसपैठ” जैसे मुद्दों पर चुनावी रणनीति बना रही है, जबकि विपक्ष इसे मुस्लिम मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने की कोशिश बता रहा है। आने वाले चरणों में सीमांचल की 24 सीटें इस बहस का राजनीतिक नतीजा तय करेंगी।