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Bihar Election 2025: इन विधानसभा क्षेत्रों में 25 साल बाद हुआ मतदान, नक्सल प्रभावित इलाकों में भी हुई जोरदार वोटिंग; जानें क्या रही वजह

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण ने इतिहास रच दिया। इस चरण की सबसे बड़ी खबर रही, गयाजी, रोहतास और जमुई के 14 गांवों में 25 साल बाद लोकतंत्र का सूरज उगना।

Bihar Election 2025

12-Nov-2025 08:06 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण ने इतिहास रच दिया। इस चरण की सबसे बड़ी खबर रही, गयाजी, रोहतास और जमुई के 14 गांवों में 25 साल बाद लोकतंत्र का सूरज उगना। दशकों से नक्सल प्रभावित इन इलाकों में पहली बार लोगों ने खुलकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि भय से भरोसे और बंदूक से बैलेट तक की लंबी यात्रा का प्रतीक बन गया।


मंगलवार की सुबह जैसे-जैसे धुंध छंटती गई, वैसे-वैसे गांवों में उम्मीदों की किरणें फैलती चली गईं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी और रंग-बिरंगे बूथों की सजावट ने लोकतंत्र के इस महापर्व को खास बना दिया। गयाजी जिले के इमामगंज प्रखंड के सेवती, फतेहपुर के बसकटबा, पतवास, चोढ़ी, डुमरिया, बांकेबाजार और बाराचट्टी के कई गांवों में ग्रामीणों ने मतदान कर्मियों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। बूथ नंबर 197 से लेकर 203 तक उत्साह का माहौल था। ग्रामीणों ने गर्व से कहा, “अब हमें किसी से डर नहीं, हम अपने गांव में वोट डाल रहे हैं।”


फतेहपुर के पतवास और चोढ़ी गांवों में भी दृश्य भावनाओं से भरा था। महिलाएं साड़ी के पल्लू से चेहरा ढंके, हाथ में वोटर स्लिप लिए सुबह से लाइन में लगी थीं। उनके चेहरों पर लोकतंत्र के प्रति आस्था झलक रही थी। स्थानीय शिक्षक रघुवर सिंह ने बताया, “पहले हमें पांच किलोमीटर पैदल चलकर गुरपा जाकर वोट डालना पड़ता था, अब अपने गांव में वोट देना किसी आज़ादी से कम नहीं।”


रोहतास जिले के नौहट्टा प्रखंड क्षेत्र के रेहल, सोली और कोरहास गांवों में भी 25 वर्षों के बाद मतदान हुआ। यह क्षेत्र कभी नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, जहां वर्षों से प्रशासन की पहुंच मुश्किल थी। मंगलवार को जब 62 प्रतिशत मतदान हुआ, तो गांवों में उल्लास का माहौल था। इन तीन गांवों में आठ मतदान केंद्र बनाए गए, जहां लगभग 5300 मतदाताओं ने मतदान किया। पहले चुनावों में नक्सली खतरे के कारण इन गांवों के मतदाताओं को पहाड़ के नीचे चुनहट्टा स्कूल में वोट डालना पड़ता था, लेकिन इस बार प्रशासन ने पहाड़ पर ही सुरक्षित माहौल में मतदान कराया।


जमुई जिले के बरहट थाना क्षेत्र के चोरमारा गांव में भी लोकतंत्र की गूंज सुनाई दी। दशकों बाद यहां मतदान हुआ, और ग्रामीणों ने पूरे जोश से इसमें भाग लिया। यह वही इलाका है जहां कभी शीर्ष नक्सली कमांडर अर्जुन कोड़ा का दबदबा था। मंगलवार को उनकी पत्नी ने खुद मतदान किया और सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीर लेकर लोकतंत्र के प्रति अपना समर्थन जताया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि बिहार के सुदूर इलाकों में अब बदलाव की बयार चल पड़ी है।


चोरमारा के आदर्श मतदान केंद्र संख्या 220 पर 1011 मतदाताओं में से 417 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। खास बात यह रही कि पूर्व नक्सलियों के परिजन पत्नी, बेटा और बहू सभी मतदान केंद्र पहुंचे और वोट डाला। यह न केवल लोकतंत्र की जीत थी, बल्कि उस व्यवस्था की सफलता भी जो हिंसा से संवाद की ओर बढ़ रही है।


गयाजी के सेवती गांव के वृद्ध संतन पासवान और विपत्ति देवी ने कहा, “आज हम अपने गांव में वोट डाल रहे हैं, अब किसी से डर नहीं।” उनके चेहरे पर जो संतोष था, वह बिहार के बदलते माहौल की गवाही दे रहा था। प्रशासन ने भी इन इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। CRPF, STF और बिहार पुलिस की तैनाती के बीच मतदाताओं ने निर्भीक होकर मतदान किया।


यह चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं थी, यह था लोकतंत्र में आस्था का पर्व। जिन इलाकों में कभी बंदूक की आवाजें गूंजती थीं, वहां आज वोट की स्याही से नई कहानी लिखी जा रही है। यह संकेत है कि बिहार अब भय की राजनीति से निकलकर विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।