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Bihar Election 2025 : बीजेपी का 88% स्ट्राइक रेट, जानें एनडीए और महागठबंधन की सभी पार्टियों की सफलता दर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने प्रचंड जीत दर्ज की। 243 में से 202 सीटें जीतकर बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ने विपक्ष को पीछे छोड़ दिया। आरजेडी 25 पर सिमटी, कांग्रेस और वामदल भी बुरी तरह धराशायी हुए।

15-Nov-2025 01:49 PM

By First Bihar

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को बदलकर रख दिया है। एनडीए ने इस चुनाव में ऐसी ऐतिहासिक और अप्रत्याशित जीत दर्ज की है, जिसने तमाम एग्जिट पोल्स के अनुमान को पूरी तरह गलत साबित कर दिया। 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए ने कुल 202 सीटों पर कब्जा कर लिया, जबकि पिछली बार नंबर दो रही आरजेडी केवल 25 सीटों पर सिमटकर मुख्य विपक्ष की भूमिका में भी कमजोर दिखाई दी।


एनडीए की बंपर जीत, बीजेपी और जेडीयू का दमदार प्रदर्शन

एनडीए की इस बड़ी जीत में सबसे अहम भूमिका बीजेपी और जेडीयू ने निभाई। बीजेपी ने 101 में से 89 सीटें जीतकर अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। उसका स्ट्राइक रेट रहा 88.1%, जो सभी दलों में सबसे अधिक है। जेडीयू ने भी दमदार खेल दिखाते हुए 101 सीटों में से 85 सीटें जीतीं। इसका सफलता दर रहा 84.2%।


एनडीए के अन्य सहयोगियों में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) का स्ट्राइक रेट 67.9 फीसदी रहा। जीतन राम मांझी की HAMS ने 6 में से 5 सीटें जीतीं। इसका स्ट्राइक रेट 83 फीसदी रहा। उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी ने 6 में से 4 सीटें अपने नाम कीं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा की सफलता दर 67 फीसदी रही। एनडीए की इस आंधी में गठबंधन के सभी सहयोगियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिसका सीधा असर कुल आंकड़ों में दिखा।


महागठबंधन बुरी तरह ध्वस्त, आरजेडी और कांग्रेस का खराब प्रदर्शन

महागठबंधन के लिए यह चुनाव बेहद निराशाजनक रहा। आरजेडी ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसके हाथ लगी सिर्फ 25 सीटें। इसका स्ट्राइक रेट 15.5% ही रहा, जो पार्टी के इतिहास में सबसे कमजोर आंकड़ों में से एक है। कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल 6 सीटें जीत पाई। उसका स्ट्राइक रेट 9.8% रहा। वामदल—सीपीआई (एमएल), भाकपा और माकपा ने मिलकर 13 उम्मीदवार मैदान में उतारे, लेकिन इन तीनों को मिलकर सिर्फ 3 सीटें मिलीं। जनसुराज पार्टी ने 237 सीटों पर चुनाव लड़कर भी एक भी सीट नहीं जीती, जो उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।


AIMIM ने बचाई अपनी मौजूदगी, 5 सीटों पर कब्जा

सीमांचल में केवल अपनी पहचान को लेकर चुनाव लड़ने वाली असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने इस बार 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन रही। इसके बावजूद पार्टी अपनी 5 सीटें बचाने में सफल रही। बिहार में एनडीए की आंधी के बीच यह AIMIM के लिए संतोषजनक परिणाम माना जा रहा है। पार्टी की सफलता दर 18% रही।


अन्य दलों का प्रदर्शन

इंडियन इन्क्लूजिव पार्टी (IIP) को 1 सीट मिली। बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने वाली बीएसपी ने 181 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और केवल 1 सीट जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। छोटे दलों के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन कुछ ने सीमित क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखी।


राजनीति का नया समीकरण और आगे की राह

चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की जनता ने इस बार एनडीए को भारी बहुमत देने का फैसला किया है। केंद्र और राज्य स्तर पर नेतृत्व के प्रभाव, संगठन की मजबूत पकड़, बूथ प्रबंधन और स्पष्ट संदेश ने मिलकर एनडीए को इस ऐतिहासिक जीत तक पहुंचाया। बीजेपी और जेडीयू की संयुक्त रणनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता इस परिणाम की प्रमुख वजहों में गिनी जा रही है।


वहीं विपक्ष के कमजोर प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि महागठबंधन मतदाताओं के बीच एकजुटता और विश्वसनीयता का संदेश देने में असफल रहा। आरजेडी और कांग्रेस के लिए यह नतीजे गंभीर आत्ममंथन का विषय हैं। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में एनडीए ने अपनी पकड़ और मजबूत की है और आने वाले पांच वर्षों के लिए राज्य में स्थिर सरकार की उम्मीद जताई जा रही है।