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Bihar Election 2025: BJP के रणनीति में फंस गया महागठबंधंन! धड़ाधड़ दिया जा रहा है सवर्णों को टिकट, आखिर क्या बनी वजह?

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव अब अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है और इस बार महागठबंधन एनडीए के खिलाफ अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटा है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस की घोषित उम्मीदवारों की सूची में यह रणनीति साफ दिख र

18-Oct-2025 09:29 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव अब अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है और इस बार महागठबंधन एनडीए के खिलाफ अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटा है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस की घोषित उम्मीदवारों की सूची में यह रणनीति साफ दिख रही है। दोनों पार्टियों ने परंपरागत वोटरों के साथ ही सर्वसमाज के मतों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चुने हैं। वामदलों ने भी अपने आधार वोट बैंक को सुरक्षित रखते हुए टिकट वितरण किया है।


दरअसल, कांग्रेस ने इस बार अपनी खोई जमीन लौटाने के प्रयास में सवर्ण, मुस्लिम और दलित समाज के नेताओं पर भरोसा जताया है। पार्टी ने अब तक 50 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसमें सवर्णों को खुले तौर पर 19 टिकट दिए गए हैं। इनमें 8 भूमिहार, 6 ब्राह्मण और 5 राजपूत शामिल हैं। पिछड़ा वर्ग से 10 नेताओं को टिकट दिया गया है, जिनमें 4 यादव, 1 कुर्मी, 1 गोस्वामी, 1 कुशवाहा और 3 वैश्य हैं। अति पिछड़ा वर्ग के 6 नेताओं को मौका दिया गया है, जबकि मुस्लिम समुदाय से 5 उम्मीदवार मैदान में हैं। अनुसूचित जाति के 9 नेताओं को कांग्रेस ने टिकट दिया है, और एक अनुसूचित जनजाति को भी उम्मीदवार बनाया गया है।


वहीं, राजद ने अपने जनाधार वोट को ध्यान में रखते हुए 51 सीटों में से 28 उम्मीदवार यादव समाज से और 6 उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से उतारे हैं। इसके साथ ही वाम दलों और वीआईपी ने भी अपने-अपने आधार वोट बैंक के अनुसार उम्मीदवार घोषित किए हैं।


महागठबंधन इस बार अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को साधने में विशेष जोर दे रहा है। बिहार में लगभग 36 प्रतिशत आबादी इस वर्ग की है, जिसे एनडीए खासकर नीतीश कुमार की जदयू का वोट बैंक माना जाता है। महागठबंधन की कोशिश है कि इस वर्ग में सेंध लगाई जाए। राहुल गांधी ने पटना, राजगीर सहित कई इलाकों में इस वर्ग के साथ संवाद किया है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस, राजद, वीआईपी और वाम दलों ने अति पिछड़ा वर्ग को टिकट देकर उन्हें भी प्राथमिकता दी है।


वाम दलों की बात करें तो उन्होंने 29 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। इसमें ओबीसी को सबसे ज्यादा 15 सीटें दी गई हैं। सीपीआई माले ने 19, सीपीआई ने 6 और सीपीएम ने 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। अति पिछड़ा वर्ग को एक, दलित को आठ और अल्पसंख्यक समाज के दो उम्मीदवारों को पार्टी सिंबल दिया गया है। सवर्ण समाज में भूमिहार से दो और राजपूत से एक उम्मीदवार बनाए गए हैं।


सुपौल स्थित पिपरा विधानसभा सीट भाकपा माले के कोटे में आई है और इस सीट पर अभी दूसरे चरण में चुनाव होना है। वर्ष 2020 के चुनाव की तुलना में इस बार महागठबंधन ने अपने सामाजिक समीकरण को और संतुलित करने की कोशिश की है। 2020 में वाम दलों ने 29 सीटों में से 4 पर अगड़ी जाति के उम्मीदवार, 3 मुस्लिम, 3 यादव और शेष दलित एवं अति पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।


इस तरह महागठबंधन ने इस बार अपनी रणनीति में सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समुदाय सभी को संतुलित तरीके से शामिल किया है। यह चुनावी समीकरण इस बात का संकेत है कि महागठबंधन हर वर्ग के मतों पर नजर रखकर चुनावी मोर्चा तैयार कर रहा है और एनडीए के मजबूत वोट बैंक पर प्रभाव डालने का प्रयास कर रहा है।