Greater Noida student death: ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी के एक और स्टूडेंट ने खुदकुशी कर ली। मृतक छात्र बिहार के पूर्णिया का रहने वाला था, जो यहां रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। छात्र के पिता का कहना है कि बेटे को इंजीनियर बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा भेजा था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह यहां उसे खो देंगे। बेटे ने पढ़ाई छोड़ दी है अगर यह बात उन्हें पता चल जाती तो वह उसे दुनिया से नहीं जाने देते। बता दें कि, बीते एक महीने में शारदा यूनिवर्सिटी के किसी छात्र द्वारा खुदकुशी का यह दूसरा मामला है।


दरअसल, शारदा यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई करने वाले एक छात्र ने शुक्रवार की रात नॉलेज पार्क स्थित निजी छात्रावास में पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली। पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें छात्र ने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी के एक और छात्र ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान बिहार के पूर्णिया निवासी शिवम कुमार के रूप में हुई


जानकारी के मुताबिक, बिहार के पूर्णिया में रहने वाले कार्तिक चंद डे का 24 वर्षीय बेटा शिवम डे शारदा यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। एक निजी हॉस्टल में रहता था। शुक्रवार की रात करीब 8:30 बजे शिवम ने हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली। हॉस्टल के कर्मचारियों ने शिवम को नजदीक के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां डॉक्टरों ने शिवम को मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मृतक के कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है।


पुलिस के अनुसार, शिवम ने नॉलेज पार्क स्थित हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। हॉस्टल स्टाफ ने आनन-फानन में उसे एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कमरे से एक सुसाइड नो भी बरामद हुआ है। अंग्रेजी में लिखे नोट में शिवम ने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। उसने लिखा आत्महत्या करना मेरा अपना फैसला है। इसमें कोई और शामिल नहीं है। मैं पिछले एक साल से इसकी योजना बना रहा था। यह दुनिया मेरे लिए नहीं है। मेरी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। यूनिवर्सिटी मेरे परिजनों की फीस लौटा दे। अगर यह देश महान बनना है तो शिक्षा प्रणाली में बदलाव करना होगा। बाबा माफ करना, मैं आपका सहारा नहीं बन सका। सुसाइड नोट में शिवम ने यह भी लिखा कि अगर उसके अंग किसी जरूरतमंद के काम आ सकें तो उन्हें दान कर दिया जाए।


मृतक के पिता कार्तिक चंद डे ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बेटे के गैरहाजिर रहने की जानकारी कभी परिवार को नहीं दी गई। जबकि फीस और अन्य औपचारिकताओं को लेकर लगातार मैसेज और ईमेल भेजे जाते रहे। अगर मुझे पता होता कि मेरा बेटा पढ़ाई छोड़ चुका है, तो मैं उसे मरने नहीं देता। पिता ने यह भी बताया कि फीस चुकाने के लिए उन्हें लोन तक लेना पड़ा था।


परिजनों का कहना है कि फर्स्ट ईयर में शिवम के साथ यूनिवर्सिटी में रैगिंग हुई थी। परिवार ने उस समय उसे समझाया कि सब ठीक हो जाएगा। शारदा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर पीआर डॉ. अजित कुमार ने बताया कि शिवम ने 2022-23 में बीटेक में दाखिला लिया था। मई 2024 की परीक्षा में वह आवश्यक CGPA प्राप्त नहीं कर पाया।


अगस्त 2024 में उसे विशेष परीक्षा का अवसर दिया गया था, लेकिन उसने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया और क्लास में उपस्थित नहीं हुआ। उनके मेंटर ने संपर्क बनाए रखा और इंटर्नशिप जैसी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की। परिवार को फीस वापस की जाएगी। ग्रेटर नोएडा में छात्रों की आत्महत्या का यह तीसरा मामला है। 18 जुलाई को शारदा यूनिवर्सिटी की एक BDS छात्रा ने आत्महत्या की थी। 30 जुलाई को जीएनआईओटी कॉलेज की बीटेक छात्रा ने जान दी थी। अब 16 अगस्त को शिवम डे ने खुदकुशी कर ली।


शिवम हाल ही में अपने परिवार के साथ वैष्णो देवी और वृंदावन भी गया था। दो महीने बिहार में रहने के बाद वह 2 अगस्त को ग्रेटर नोएडा लौटा था। परिवार का कहना है कि उसने कभी महसूस नहीं होने दिया कि वह पढ़ाई नहीं कर रहा है। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और यूनिवर्सिटी प्रशासन की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही आत्महत्याओं से छात्रों की सुरक्षा और काउंसलिंग व्यवस्था की कमी भी उजागर हो रही है।