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प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, चुनाव रद्द करने वाली याचिका खारिज; SC ने पूछा- जनता ने नकार दिया तो अदालत आ गए?

Supreme Court: बिहार चुनाव रद्द करने की जनसुराज की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज कर दी और हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।

Supreme Court
प्रशांत किशोर को झटका
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Supreme Court: प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव रद्द कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनसुराज ने अदालत में दलील दी थी कि चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं के ऐलान और उनके क्रियान्वयन के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं, इसलिए नतीजों को अवैध घोषित कर नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए।


इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि जनता ने आपको खारिज कर दिया है, तो राहत पाने के लिए अदालत आ जाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत के मंच का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जनसुराज की याचिका को सुनवाई से पहले ही खारिज कर दिया।


चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि जनसुराज ने बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 242 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। बेंच ने सवाल किया कि आपको कितने वोट मिले? यदि किसी योजना से आपत्ति थी तो चुनाव से पहले उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए थी। ऐसा नहीं हो सकता कि हार के बाद पूरे चुनाव को ही रद्द करने की मांग की जाए।


हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि यह मामला राज्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए जनसुराज को हाई कोर्ट जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख को देखते हुए जनसुराज ने अपनी याचिका वापस लेने की इच्छा जताई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। जनसुराज की ओर से पेश वकील सीयू सिंह ने दलील दी कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान मतदाताओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए, जिससे लोगों को प्रभावित करने की कोशिश हुई। पार्टी ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर सवाल उठाए।


याचिका में कहा गया कि नीतीश कुमार सरकार ने चुनाव से ठीक पहले इस योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को 10 हजार रुपये देने का ऐलान किया था, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें। इसके अलावा, आकलन के बाद इन महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने का प्रावधान भी किया गया। इस योजना को जीविका योजना से जोड़ा गया, जिसमें पहले से एक करोड़ महिलाएं पंजीकृत थीं। बाद में अपंजीकृत महिलाओं को भी शामिल करने की अनुमति दी गई, जिससे लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 1.56 करोड़ तक पहुंच गई।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता