Budget Session 2026 : मंगल पांडेय की जगह स्वास्थ्य विभाग के सवालों का जवाब दे रहे मंत्री बार-बार फंस गए! सवाल ढाका का जवाब बेलागंज का देने लगे; हंसने लगे पक्ष - विपक्ष के विधायक

विधायक जब ढाका क्षेत्र से सवाल कर रहे थे, मंत्री बेलागंज का विवरण देने लगे। इस विसंगति ने सदन में हंसी का माहौल पैदा कर दिया। विपक्षी विधायक ने टिप्पणी की कि “इनको जवाब देने का क्रेश कोर्स करवा दिया जाए।”

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 06 Feb 2026 11:49:05 AM IST

Budget Session 2026 : मंगल पांडेय की जगह स्वास्थ्य विभाग के सवालों का जवाब दे रहे मंत्री बार-बार फंस गए! सवाल ढाका का जवाब बेलागंज का देने लगे; हंसने लगे पक्ष - विपक्ष के विधायक

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Budget Session 2026 : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन एक घटना ने सदन में हंसी और चर्चा का माहौल पैदा कर दिया। आज स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए मंत्री प्रमोद कुमार खड़े हुए थे। हालांकि, प्रमोद कुमार इस समय स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन उनके जवाब देने का तरीका इतना असंगत और विसंगत था कि यह पूरी विधानसभा में चर्चा का विषय बन गया।


सदन में सवाल यह था कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी कई समस्याओं और मुद्दों पर सरकार क्या कदम उठा रही है, लेकिन मंत्री प्रमोद कुमार अक्सर सवाल का सही जवाब देने में असफल दिखाई दिए। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा कि किस प्रश्न का किस प्रकार उत्तर देना है। उनके उत्तर अक्सर किसी अन्य जगह या विभाग से जुड़े हुए लगते थे।


एक रोचक और हास्यास्पद वाकया तब सामने आया जब एक विधायक ने मंत्री से ढाका विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा सवाल पूछा। इसके जवाब में मंत्री प्रमोद कुमार बेलागंज का विवरण देने लगे। इस विसंगति को देखकर विपक्षी और सत्ता पक्ष दोनों के विधायक हंस पड़े। सदन में हंसी का माहौल बन गया और स्पीकर को बीच में ही सवाल को स्थगित करना पड़ा। विपक्षी विधायक ने यहाँ तक कह दिया कि “इनको जवाब कैसे दिया जाता है उसका क्रेश कोर्स करवा दिजिए।” यह टिप्पणी सदन में चर्चा का केंद्र बन गई।


इससे पहले विपक्ष के एक विधायक ने स्वास्थ्य विभाग से संबंधित मुद्दे पर प्रश्न पूछा, विभाग के मंत्री मंगल पांडेय की जगह प्रभारी मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी जवाब देने के लिए खड़े हुए। लेकिन सवाल का जवाब देने में वे फंसते गए। मंत्री जब जवाब देने लगे तो उनके द्वारा बोले गए शब्दों में कई अंग्रेज़ी शब्द शामिल थे, जिससे न सिर्फ विपक्षी विधायक बल्कि कुछ सदस्यों को भी समझने में कठिनाई हुई। उनके जवाब की शैली इतनी जटिल और अस्पष्ट थी कि यह साफ तौर पर यह पता नहीं चल पा रहा था कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कहना चाहती है।