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24-Jan-2026 03:16 PM
By FIRST BIHAR
Patna News: पूजा का संबंध श्रद्धा और भक्ति से है। श्रद्धा के अभाव में की गयी कोई पूजा फल नहीं देती। केवल श्रद्धावान विद्यार्थियों को ही माता सरस्वती की पूजा का अधिकार है। इसके अभाव में पूजा का अभिनय माता का अनादर और उपहास है। यह बातें शुक्रवार को बेऊर स्थित इण्डियन इंस्टिच्युट ऑफ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च में आयोजित सरस्वती पूजनोत्सव में विद्यार्थियों को बधाई और मंगलकामनाएँ देते हुए, संस्थान के निदेशक-प्रमुख और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कही।
उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में सरस्वती-पूजा समेत प्रायः सभी सांस्कृतिक आयोजनों को कुछ स्वार्थी और असामाजिक तत्त्वों द्वारा पथ-भ्रष्ट करने की कुचेष्टा की जा रही है। श्रद्धा के स्थान पर कुत्सित बुद्धि आ गयी है। भक्ति-गीत का स्थान अश्लील गानों ने ले लिया। भक्ति-भाव से झूमने वाले लोगों के स्थान पर छिछोरे नृत्य करते दिख रहे हैं।
अनिल सुलभ ने कहा कि बदले समाज का दुर्भाग्य है की पूजा के दिनों में शासन को पुलिस बल की आवश्यकता पड़ती है। यदि स्थिति यह आ रही हो, तो यह माता के आराधकों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे तत्त्वों को सांस्कृतिक-उत्सवों से दूर रखने की आवश्यकता है। यदि यह संभव न हो तो सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे आयोजनों को बंद कर देना अधिक उचित है। कम सेकम माता का अपमान तो न हो।
इस अवसर पर डा सुलभ ने सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को पूजा की बधाई दी और प्रार्थना की कि माता सबको सदबुद्धि और विवेक प्रदान करें। शैक्षणिक-संस्थानों की गरिमा-महिमा बढ़े। लोग चरित्रवान और गुणवान बनें।
इसके पूर्व विद्वान पुरोहित संपूर्णानंद जी द्वारा माता की श्रद्धापूर्वक पूजा करायी गयी और प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर पूजा के यज्ञमान और फ़िज़ियोथेरापी के वरीय छात्र सोनू कुमार झा, किरण झा, डा आकाश कुमार, प्रो संजीत कुमार, प्रो देवराज, प्रो मधुमाला, डा नवनीत कुमार, प्रो चन्द्रा आभा, प्रो शालिनी कुमारी, आभास कुमार, अधिवक्ता अहसास मणिकान्त, सूबेदार संजय कुमार, विनय प्रसाद, कुमार करुणा निधि समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मी और विद्यार्थी उपस्थित थे।
Patna News: पूजा का संबंध श्रद्धा और भक्ति से है। श्रद्धा के अभाव में की गयी कोई पूजा फल नहीं देती। केवल श्रद्धावान विद्यार्थियों को ही माता सरस्वती की पूजा का अधिकार है। इसके अभाव में पूजा का अभिनय माता का अनादर और उपहास है। यह बातें शुक्रवार को बेऊर स्थित इण्डियन इंस्टिच्युट ऑफ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च में आयोजित सरस्वती पूजनोत्सव में विद्यार्थियों को बधाई और मंगलकामनाएँ देते हुए, संस्थान के निदेशक-प्रमुख और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कही।
उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में सरस्वती-पूजा समेत प्रायः सभी सांस्कृतिक आयोजनों को कुछ स्वार्थी और असामाजिक तत्त्वों द्वारा पथ-भ्रष्ट करने की कुचेष्टा की जा रही है। श्रद्धा के स्थान पर कुत्सित बुद्धि आ गयी है। भक्ति-गीत का स्थान अश्लील गानों ने ले लिया। भक्ति-भाव से झूमने वाले लोगों के स्थान पर छिछोरे नृत्य करते दिख रहे हैं।
अनिल सुलभ ने कहा कि बदले समाज का दुर्भाग्य है की पूजा के दिनों में शासन को पुलिस बल की आवश्यकता पड़ती है। यदि स्थिति यह आ रही हो, तो यह माता के आराधकों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे तत्त्वों को सांस्कृतिक-उत्सवों से दूर रखने की आवश्यकता है। यदि यह संभव न हो तो सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे आयोजनों को बंद कर देना अधिक उचित है। कम सेकम माता का अपमान तो न हो।
इस अवसर पर डा सुलभ ने सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को पूजा की बधाई दी और प्रार्थना की कि माता सबको सदबुद्धि और विवेक प्रदान करें। शैक्षणिक-संस्थानों की गरिमा-महिमा बढ़े। लोग चरित्रवान और गुणवान बनें।
इसके पूर्व विद्वान पुरोहित संपूर्णानंद जी द्वारा माता की श्रद्धापूर्वक पूजा करायी गयी और प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर पूजा के यज्ञमान और फ़िज़ियोथेरापी के वरीय छात्र सोनू कुमार झा, किरण झा, डा आकाश कुमार, प्रो संजीत कुमार, प्रो देवराज, प्रो मधुमाला, डा नवनीत कुमार, प्रो चन्द्रा आभा, प्रो शालिनी कुमारी, आभास कुमार, अधिवक्ता अहसास मणिकान्त, सूबेदार संजय कुमार, विनय प्रसाद, कुमार करुणा निधि समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मी और विद्यार्थी उपस्थित थे।