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02-Jul-2025 04:08 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत महम्मदगंज पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय शंकर पट्टी में बीते दिन को मिड-डे मील खाने के बाद अचानक 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। खिचड़ी और चोखा खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थिति गंभीर होते देख परिजनों ने बच्चों को छातापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार आया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तत्काल चिकित्सीय टीम तैनात कर दी गई और बच्चों की निगरानी शुरू कर दी गई।
इस संवेदनशील घटना की जानकारी मिलते ही विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पनोरमा ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री संजीव मिश्रा बुधवार को विद्यालय पहुंचे और घटनास्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील में उपयोग किए गए चावल को सड़ा हुआ पाया गया, जो गंभीर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। श्री मिश्रा ने मीडिया को बताया कि यह घटना मात्र एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता और जवाबदेही की कमी का परिणाम है।
निरीक्षण के दौरान श्री मिश्रा ने यह भी पाया कि विद्यालय में सर्व शिक्षा अभियान के तहत भेजी गई पुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री उपेक्षित अवस्था में इधर-उधर बिखरी हुई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विद्यालय प्रशासन शिक्षा व्यवस्था को गंभीरता से नहीं ले रहा है। स्कूल की आधारभूत संरचना भी चिंताजनक स्थिति में है। केवल चार कमरे हैं, जिनमें कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई चल रही है। कई कक्षाओं के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मिश्रा ने बीईओ, डीईओ और जिलाधिकारी से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि “छातापुर में इस तरह की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। कई बार मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण दोषियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों, भोजन आपूर्तिकर्ताओं और लापरवाह विद्यालय कर्मियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
श्री मिश्रा ने इस दौरान विद्यालय की जर्जर हालत पर चिंता जताई और राज्य सरकार व शिक्षा विभाग से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक पवित्र प्रक्रिया है और उसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
उन्होंने 5 प्रमुख मांगें भी रखीं। मिड-डे मील की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई, विद्यालय की आधारभूत संरचना को मजबूत करना, शिक्षकों की संख्या बढ़ाना और बच्चों को समय पर शैक्षणिक सामग्री व सुविधाएं उपलब्ध कराना।
निरीक्षण के दौरान श्री मिश्रा ने बच्चों के अभिभावकों से भी बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वीआईपी पार्टी इस मामले को लेकर राज्य स्तर तक संघर्ष करेगी और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर मंच पर आवाज उठाएगी। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि सेवा और जवाबदेही होनी चाहिए—और बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
Bihar News: बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत महम्मदगंज पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय शंकर पट्टी में बीते दिन को मिड-डे मील खाने के बाद अचानक 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। खिचड़ी और चोखा खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थिति गंभीर होते देख परिजनों ने बच्चों को छातापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार आया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तत्काल चिकित्सीय टीम तैनात कर दी गई और बच्चों की निगरानी शुरू कर दी गई।
इस संवेदनशील घटना की जानकारी मिलते ही विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पनोरमा ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री संजीव मिश्रा बुधवार को विद्यालय पहुंचे और घटनास्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील में उपयोग किए गए चावल को सड़ा हुआ पाया गया, जो गंभीर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। श्री मिश्रा ने मीडिया को बताया कि यह घटना मात्र एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता और जवाबदेही की कमी का परिणाम है।
निरीक्षण के दौरान श्री मिश्रा ने यह भी पाया कि विद्यालय में सर्व शिक्षा अभियान के तहत भेजी गई पुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री उपेक्षित अवस्था में इधर-उधर बिखरी हुई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विद्यालय प्रशासन शिक्षा व्यवस्था को गंभीरता से नहीं ले रहा है। स्कूल की आधारभूत संरचना भी चिंताजनक स्थिति में है। केवल चार कमरे हैं, जिनमें कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई चल रही है। कई कक्षाओं के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मिश्रा ने बीईओ, डीईओ और जिलाधिकारी से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि “छातापुर में इस तरह की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। कई बार मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण दोषियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों, भोजन आपूर्तिकर्ताओं और लापरवाह विद्यालय कर्मियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
श्री मिश्रा ने इस दौरान विद्यालय की जर्जर हालत पर चिंता जताई और राज्य सरकार व शिक्षा विभाग से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक पवित्र प्रक्रिया है और उसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
उन्होंने 5 प्रमुख मांगें भी रखीं। मिड-डे मील की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई, विद्यालय की आधारभूत संरचना को मजबूत करना, शिक्षकों की संख्या बढ़ाना और बच्चों को समय पर शैक्षणिक सामग्री व सुविधाएं उपलब्ध कराना।
निरीक्षण के दौरान श्री मिश्रा ने बच्चों के अभिभावकों से भी बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वीआईपी पार्टी इस मामले को लेकर राज्य स्तर तक संघर्ष करेगी और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर मंच पर आवाज उठाएगी। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि सेवा और जवाबदेही होनी चाहिए—और बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।