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fake teachers Bihar : वाह जी वाह ! शिक्षा विभाग के अंदर चल रहा बड़ा झोल, सस्पेंड टीचर की लग गई बोर्ड एग्जाम में ड्यूटी, DEO साहब सब जानते थे फिर भी ...

सीतामढ़ी में राम पुकार राय और पूनम कुमारी जैसे बर्खास्त शिक्षकों को इंटरमीडिएट परीक्षा ड्यूटी पर लगाने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

fake teachers Bihar : वाह जी वाह ! शिक्षा विभाग के अंदर चल रहा बड़ा झोल, सस्पेंड टीचर की लग गई बोर्ड एग्जाम में ड्यूटी, DEO साहब सब जानते थे फिर भी ...

16-Feb-2026 03:06 PM

By First Bihar

बिहार में कदाचार मुक्त परीक्षा के दावों के बीच सीतामढ़ी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ फर्जी प्रमाण पत्र मामले में पहले ही सेवा से बर्खास्त किए जा चुके दो शिक्षकों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट परीक्षा में ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया। इस चूक ने न केवल परीक्षा की शुचिता पर संदेह पैदा किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि विभाग के भीतर समन्वय और डेटा प्रबंधन में गंभीर कमी है।


मामले की जांच में पता चला कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर ने बथनाहा प्रखंड के सात शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए थे। इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी और स्थापना शाखा के पत्रांकों की समीक्षा में 24 अगस्त 2024 को नियोजन इकाई की बैठक में सभी शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया गया। इनमें शिक्षक राम पुकार राय और शिक्षिका पूनम कुमारी भी शामिल थीं, जिनकी नियुक्ति क्रमशः 2007 और 2010 में हुई थी। बर्खास्तगी के बाद इन पर थाना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी।


हालाँकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को उनकी बर्खास्तगी की जानकारी होने के बावजूद परीक्षा ड्यूटी की डेटाबेस सूची में इनके नाम बने रहे। राम पुकार राय की तैनाती सीतामढ़ी उच्च माध्यमिक विद्यालय, डुमरा में और पूनम कुमारी की ड्यूटी रघुनाथ झा कॉलेज में कर दी गई। 2 फरवरी से शुरू हुई इंटरमीडिएट परीक्षा में दोनों ने शिक्षक के रूप में कार्य किया। यह त्रुटि तब उजागर हुई जब परीक्षा समाप्ति के बाद शिक्षक विरमण पत्र लेकर अपने विद्यालय पहुंचे और आगामी मैट्रिक परीक्षा में ड्यूटी होने का दावा किया।


विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि इन शिक्षकों को अक्टूबर 2024 में ही पदमुक्त कर दिया गया था और तत्कालीन डीपीओ के निर्देशानुसार उनकी उपस्थिति दर्ज करने पर रोक थी। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने उन्हें सक्रिय शिक्षक मानकर संवेदनशील परीक्षा कार्यों में तैनात कर दिया। सूत्रों के अनुसार, शिक्षकों ने जिला मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक आदेश का हवाला देकर ड्यूटी ज्वाइन की, जिससे लगता है कि सूची को अपडेट करने में जानबूझकर ढिलाई बरती गई।


बिहार में पहले से ही फर्जी शिक्षकों की छंटनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विभाग चर्चा में है। ऐसे में इस तरह की लापरवाही विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करती है। सवाल यह उठता है कि यदि बर्खास्त शिक्षक परीक्षा केंद्रों पर तैनात रहे तो परीक्षा की गोपनीयता, निष्पक्षता और छात्रों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हुई।


अब यह जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर आ गई है कि वे इस डेटा प्रबंधन की चूक के लिए जिम्मेदार कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही, यह घटना यह संकेत देती है कि विभाग को अपनी प्रक्रियाओं और डाटा अपडेट सिस्टम में सुधार करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं और परीक्षा की शुचिता कायम रह सके।


इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजों पर “कदाचार मुक्त परीक्षा” का दावा करना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए वास्तविक नियंत्रण, निगरानी और डेटा प्रबंधन का सही ढंग से संचालन जरूरी है। यदि इन बुनियादी व्यवस्थाओं में भी कमी रहेगी तो परीक्षा की निष्पक्षता और शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता दोनों ही प्रभावित होंगी।