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09-Feb-2026 07:20 PM
By First Bihar
PATNA:भ्रष्टाचार मामले में निगरानी कोर्ट ने ग्रामीण विकास विभाग के जूनियर इंजीनियर जयराम सिंह को दोषी ठहराया है। आरोपी को एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया गया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी।
पटना निगरानी कोर्ट के न्यायाधीश मोहम्मद रूस्तम द्वारा नवादा के कनीय अभियंता जयराम सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13 (2) सह पठित धारा 13 (1) (डी) के तहत निगरानी थाना कांड संख्या-25/2008 (विशेष वाद सं-20/2008) में दोषी ठहराया।
बता दें कि घूसखोरी का यह मामला नवादा के ग्रामीण विकास विभाग के कनीय अभियंता जयराम सिंह से जुड़ा है। जो 2008 का है। जयराम सिंह पर यह आरोप था कि इन्होंने नवादा के नारदीगंज के रहने वाले रामप्रवेश प्रसाद के बेटे इन्दल प्रसाद से मापी पुस्तिका लिखने के एवज में 3,200 रुपये बतौर घूस की मांग की थी। इस संबंध में निगरानी में शिकायत दर्ज करायी गयी थी।
जिसके बाद आरोपी को 09.05.2008 को 3,000/- रूपये रिश्वत लेते निगरानी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता पुलिस उपाधीक्षक महाराजा कनिष्क कुमार सिंह, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा सटीक और समय पर आरोप-पत्र दायर किया। बिहार सरकार की ओर से श्री रितेश कुमार, विशेष लोक अभियोजक निगरानी, पटना ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की।
जयराम सिंह, सम्प्रति कनीय अभियंता, गामीण विकास विभाग, विशेष प्रमंडल, जिला-नवादा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 में एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/- (दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13 (2) सह पठित धारा-13 (1) (डी) में एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/- (दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी। अब तक वर्ष 2026 में कुल 02 भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी गई है। ये दोषसिद्ध की कार्रवाई मो० रूस्तम, माननीय न्यायाधीश, निगरानी के न्यायालय पटना द्वारा की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।