Bihar liquor ban failure : बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून और राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला वैशाली जिले के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है, जो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का गृह क्षेत्र माना जाता है। यहां एक फास्ट फूड दुकान में शराब के नशे में धुत युवकों द्वारा की गई जमकर तोड़फोड़ और मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह घटना न सिर्फ शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत उजागर करती है, बल्कि पुलिस की सक्रियता और कानून के डर पर भी सवाल खड़े करती है।


वायरल सीसीटीवी फुटेज राघोपुर थाना क्षेत्र के कन्हाई चौक की बताई जा रही है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि दो युवक लड़खड़ाते हुए एक फास्ट फूड दुकान पर पहुंचते हैं। उनकी चाल-ढाल और हरकतों से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे शराब के नशे में थे। शुरुआत में दोनों युवक दुकान पर पहुंचकर कुछ खाने का ऑर्डर देते हैं। दुकानदार उन्हें बताता है कि पहले से आए ऑर्डर तैयार होने के बाद उनका ऑर्डर बनाया जाएगा। बस इसी बात पर दोनों युवक आपा खो बैठते हैं।


बताया जा रहा है कि दुकानदार की बात सुनते ही दोनों युवक आगबबूला हो गए और गाली-गलौज शुरू कर दी। जब दुकानदार ने इसका विरोध किया और संयम बरतने की बात कही, तो दोनों युवक उग्र हो गए। कुछ ही पलों में विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि दोनों युवक दुकान में रखे सामान को इधर-उधर फेंकने लगते हैं, कुर्सियां पलट दी जाती हैं और काउंटर पर तोड़फोड़ की जाती है। इसके बाद दुकानदार के साथ मारपीट भी की जाती है।


इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों युवक अकेले नहीं थे। कुछ ही देर में उनके अन्य सहयोगी भी मौके पर पहुंच गए और सभी मिलकर दुकान में जमकर उत्पात मचाने लगे। घटना के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोग डर के कारण बीच-बचाव करने से कतराते नजर आए। पूरी घटना कुछ ही मिनटों में घटित हो गई, लेकिन इसका असर लंबे समय तक इलाके में चर्चा का विषय बना रहा।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार जैसे राज्य में, जहां पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, खुलेआम शराब के नशे में युवक उत्पात मचाते दिखाई दे रहे हैं। यह घटना शराबबंदी के दावों की पोल खोलती नजर आती है। सवाल उठता है कि जब शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है, तो ये युवक शराब के नशे में आखिर पहुंचे कैसे? क्या अवैध शराब की बिक्री अब भी धड़ल्ले से जारी है? और अगर हां, तो इसे रोकने में प्रशासन क्यों नाकाम साबित हो रहा है?


घटना को लेकर राघोपुर थानाध्यक्ष का कहना है कि फिलहाल दुकानदार की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और उसी के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। थानाध्यक्ष के अनुसार, वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ जांच के भरोसे ऐसे मामलों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। उनका आरोप है कि इलाके में शराब का अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा है और कुछ असामाजिक तत्वों को पुलिस का कोई डर नहीं है। यही वजह है कि वे खुलेआम नशे की हालत में कानून को हाथ में लेने से भी नहीं हिचकते।


यह घटना इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है क्योंकि यह तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र राघोपुर की है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था और शराबबंदी को लेकर हमलावर रहा है, लेकिन अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सभी राजनीतिक दलों के गढ़ों में हालात एक जैसे नहीं हैं? आम जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।


कुल मिलाकर, राघोपुर की यह घटना बिहार में कानून-व्यवस्था और शराबबंदी कानून की सख्ती पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। वायरल तस्वीरें और वीडियो यह साफ दिखाते हैं कि जमीनी स्तर पर हालात उतने बेहतर नहीं हैं, जितने कागजों में दिखाए जाते हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है और क्या दोषियों को सजा मिल पाती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।