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26-Jan-2026 10:17 AM
By First Bihar
Mirzapur sweet : मिठाई का नाम सुनते ही अक्सर लोगों की जुबान पर बर्फी का नाम आता है, लेकिन शुगर और सेहत की चिंता के कारण कई लोग मिठाई से दूरी बना लेते हैं। मिठाई खाने का मन तो करता है, लेकिन मजबूरी में मुंह मोड़ना पड़ता है। मिर्जापुर के कछवां इलाके में इसी परेशानी को समझते हुए एक बेटे ने अपने पिता के लिए ऐसा प्रयोग किया, जो आज सैकड़ों लोगों की पसंद बन चुका है। गुड़ से बनी बर्फी अब सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि सेहत और स्वाद का भरोसा बन गई है।
कछवां की पुरानी दुकान में मिली नई पहचान
मिर्जापुर के कछवां इलाके की पुरानी और भरोसेमंद मिठाई की दुकान श्रीजी मिष्ठान भंडार अपनी पारंपरिक मिठाइयों के लिए कई वर्षों से जानी जाती है। लेकिन साल 2018 के बाद से इस दुकान की पहचान गुड़ की बर्फी से बनने लगी। धीरे-धीरे इस मिठाई की चर्चा सिर्फ कछवां तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के इलाकों में भी फैल गई। आज स्थिति यह है कि लोग खासतौर पर गुड़ की बर्फी खरीदने के लिए इसी दुकान तक आते हैं।
पिता की बीमारी से निकला अनोखा आइडिया
दुकान के संचालक भानु प्रताप सिंह बताते हैं कि साल 2018 में उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़े थे और उन्हें शुगर की समस्या थी। डॉक्टरों ने मीठा खाने से साफ मना कर दिया था। घर में मिठाई बनती थी, लेकिन पिता उसे खा नहीं पाते थे। बेटे के मन में यह बात हमेशा खटकती रही। इसी बीच उन्होंने कम शुगर वाली मिठाई बनाने का विचार किया। क्योंकि गुड़ को शक्कर की तुलना में बेहतर माना जाता है, इसलिए उन्होंने गुड़ से बर्फी बनाने का निर्णय लिया।
कई बार असफलता, फिर मिली कामयाबी
भानु प्रताप बताते हैं कि गुड़ की बर्फी बनाना उतना आसान नहीं था जितना उन्होंने सोचा था। कई बार बर्फी चाशनी में सही नहीं उतर पाई। कभी बर्फी सख्त हो जाती थी, तो कभी बिखर जाती थी। इस दौरान काफी नुकसान भी हुआ। लेकिन हार नहीं मानी। लगातार प्रयास के बाद एक दिन गुड़ की बर्फी बिल्कुल सही चाशनी में उतर गई। स्वाद भी शानदार था और बनावट भी बेहतरीन निकली।
पिता की सहमति से शुरू हुई बिक्री
पहली बार जब यह बर्फी सही बनी, तो सबसे पहले इसे उनके पिता ने चखा। पिता को इसका स्वाद पसंद आया और उन्होंने इसे दुकान पर बेचने की सलाह दी। पिता की सहमति के बाद गुड़ की बर्फी को दुकान में बिक्री के लिए रखा गया। शुरुआत में ग्राहक कम थे, लेकिन धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। जो भी ग्राहक एक बार इसे खाता, वह दोबारा जरूर लौटकर आता।
खोया, गुड़ और इलायची से तैयार होती है बर्फी
गुड़ की बर्फी बनाने में मुख्य रूप से खोया, शुद्ध गुड़ और इलायची का इस्तेमाल होता है। खोया और गुड़ के मेल से बर्फी की गुणवत्ता बेहतर होती है और इसकी उम्र भी बढ़ जाती है। इलायची इसकी खुशबू और स्वाद को और खास बना देती है। दुकानदार का कहना है कि इस बर्फी में किसी तरह का केमिकल या मिलावट नहीं की जाती।
कीमत और मांग में कोई फर्क नहीं
भानु प्रताप बताते हैं कि गुड़ की बर्फी की कीमत खोया के बाजार भाव पर निर्भर करती है। सामान्य दिनों में इसकी कीमत कम रहती है, लेकिन शादी-ब्याह के सीजन में दाम बढ़ जाते हैं। शादी के मौसम में इसकी कीमत 360 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद ग्राहकों की संख्या कम नहीं होती।
दूर-दूर से आते हैं लोग
गुड़ की बर्फी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग कछवां आते हैं। आम लोगों के अलावा अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस मिठाई को खास तौर पर पसंद करते हैं। कई ग्राहक रोजाना एक से दो बर्फी खाते हैं, जबकि कई लोग इसे पैक कराकर बाहर के शहरों में भी ले जाते हैं।
दुकानदार का कहना है कि जो भी ग्राहक एक बार गुड़ की बर्फी का स्वाद चख लेता है, वह दोबारा जरूर लौटता है। स्वाद के साथ-साथ यह बर्फी लोगों को यह भरोसा भी देती है कि वे मिठाई खाकर सेहत से समझौता नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि गुड़ की बर्फी आज मिर्जापुर में खास पहचान बना चुकी है।
Mirzapur sweet : मिठाई का नाम सुनते ही अक्सर लोगों की जुबान पर बर्फी का नाम आता है, लेकिन शुगर और सेहत की चिंता के कारण कई लोग मिठाई से दूरी बना लेते हैं। मिठाई खाने का मन तो करता है, लेकिन मजबूरी में मुंह मोड़ना पड़ता है। मिर्जापुर के कछवां इलाके में इसी परेशानी को समझते हुए एक बेटे ने अपने पिता के लिए ऐसा प्रयोग किया, जो आज सैकड़ों लोगों की पसंद बन चुका है। गुड़ से बनी बर्फी अब सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि सेहत और स्वाद का भरोसा बन गई है।
कछवां की पुरानी दुकान में मिली नई पहचान
मिर्जापुर के कछवां इलाके की पुरानी और भरोसेमंद मिठाई की दुकान श्रीजी मिष्ठान भंडार अपनी पारंपरिक मिठाइयों के लिए कई वर्षों से जानी जाती है। लेकिन साल 2018 के बाद से इस दुकान की पहचान गुड़ की बर्फी से बनने लगी। धीरे-धीरे इस मिठाई की चर्चा सिर्फ कछवां तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के इलाकों में भी फैल गई। आज स्थिति यह है कि लोग खासतौर पर गुड़ की बर्फी खरीदने के लिए इसी दुकान तक आते हैं।
पिता की बीमारी से निकला अनोखा आइडिया
दुकान के संचालक भानु प्रताप सिंह बताते हैं कि साल 2018 में उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़े थे और उन्हें शुगर की समस्या थी। डॉक्टरों ने मीठा खाने से साफ मना कर दिया था। घर में मिठाई बनती थी, लेकिन पिता उसे खा नहीं पाते थे। बेटे के मन में यह बात हमेशा खटकती रही। इसी बीच उन्होंने कम शुगर वाली मिठाई बनाने का विचार किया। क्योंकि गुड़ को शक्कर की तुलना में बेहतर माना जाता है, इसलिए उन्होंने गुड़ से बर्फी बनाने का निर्णय लिया।
कई बार असफलता, फिर मिली कामयाबी
भानु प्रताप बताते हैं कि गुड़ की बर्फी बनाना उतना आसान नहीं था जितना उन्होंने सोचा था। कई बार बर्फी चाशनी में सही नहीं उतर पाई। कभी बर्फी सख्त हो जाती थी, तो कभी बिखर जाती थी। इस दौरान काफी नुकसान भी हुआ। लेकिन हार नहीं मानी। लगातार प्रयास के बाद एक दिन गुड़ की बर्फी बिल्कुल सही चाशनी में उतर गई। स्वाद भी शानदार था और बनावट भी बेहतरीन निकली।
पिता की सहमति से शुरू हुई बिक्री
पहली बार जब यह बर्फी सही बनी, तो सबसे पहले इसे उनके पिता ने चखा। पिता को इसका स्वाद पसंद आया और उन्होंने इसे दुकान पर बेचने की सलाह दी। पिता की सहमति के बाद गुड़ की बर्फी को दुकान में बिक्री के लिए रखा गया। शुरुआत में ग्राहक कम थे, लेकिन धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। जो भी ग्राहक एक बार इसे खाता, वह दोबारा जरूर लौटकर आता।
खोया, गुड़ और इलायची से तैयार होती है बर्फी
गुड़ की बर्फी बनाने में मुख्य रूप से खोया, शुद्ध गुड़ और इलायची का इस्तेमाल होता है। खोया और गुड़ के मेल से बर्फी की गुणवत्ता बेहतर होती है और इसकी उम्र भी बढ़ जाती है। इलायची इसकी खुशबू और स्वाद को और खास बना देती है। दुकानदार का कहना है कि इस बर्फी में किसी तरह का केमिकल या मिलावट नहीं की जाती।
कीमत और मांग में कोई फर्क नहीं
भानु प्रताप बताते हैं कि गुड़ की बर्फी की कीमत खोया के बाजार भाव पर निर्भर करती है। सामान्य दिनों में इसकी कीमत कम रहती है, लेकिन शादी-ब्याह के सीजन में दाम बढ़ जाते हैं। शादी के मौसम में इसकी कीमत 360 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद ग्राहकों की संख्या कम नहीं होती।
दूर-दूर से आते हैं लोग
गुड़ की बर्फी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग कछवां आते हैं। आम लोगों के अलावा अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस मिठाई को खास तौर पर पसंद करते हैं। कई ग्राहक रोजाना एक से दो बर्फी खाते हैं, जबकि कई लोग इसे पैक कराकर बाहर के शहरों में भी ले जाते हैं।
दुकानदार का कहना है कि जो भी ग्राहक एक बार गुड़ की बर्फी का स्वाद चख लेता है, वह दोबारा जरूर लौटता है। स्वाद के साथ-साथ यह बर्फी लोगों को यह भरोसा भी देती है कि वे मिठाई खाकर सेहत से समझौता नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि गुड़ की बर्फी आज मिर्जापुर में खास पहचान बना चुकी है।