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25-Jan-2026 01:30 PM
By First Bihar
NEET student rape case : पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की छात्रा के साथ हुए कथित रेप और मौत के मामले में जांच में बड़ा मोड़ आया है। SSP ने इस गंभीर घटना के बाद चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई को प्रशासन की सख्ती और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
घटना के बाद पुलिस प्रशासन और SIT लगातार जांच में जुटा हुआ था। इसी बीच फॉरेंसिक टीम ने शनिवार को SIT को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म की पुष्टि की गई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से रेप की पुष्टि की गई है, जो इस केस को और गंभीर बना देती है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट आने से पहले SIT की टीम ने पांच बार जहानाबाद जाकर पीड़िता के परिवार से पूछताछ की। जांच के दौरान परिवार के सदस्यों के साथ-साथ छात्रा के पिता, ममेरे भाई, ऑटो ड्राइवर और कुछ युवकों से थाने में 3-3 घंटे तक पूछताछ की गई। जांच के दौरान कई सवालों के जवाब तलाशे गए और घटनाक्रम की पड़ताल की गई।
अब इस मामले में ताजा अपडेट यह है कि SIT की जांच के बाद पहली बार CID की एंट्री हुई है। CID की टीम ने मामले की गहनता और संवेदनशीलता को देखते हुए FSL के डायरेक्टर बिपिन चौधरी के नेतृत्व में अपने दल बल के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल में पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। CID की इस एंट्री को मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
CID की टीम हॉस्टल में सील किए गए कमरों, संभावित सबूतों और संदिग्ध स्थानों की जांच कर रही है। साथ ही CCTV फुटेज, फिंगरप्रिंट, डोर हैंडल, बालों और अन्य फॉरेंसिक सबूतों की पड़ताल की जा रही है। टीम के साथ FSL विशेषज्ञ भी मौजूद हैं, जो स्थल पर ही जांच के दौरान उपलब्ध सबूतों की प्रामाणिकता और सही तरीके से संकलन सुनिश्चित कर रहे हैं।
इस बीच प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हॉस्टल के संचालकों और स्टाफ के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की बात कही है। छात्रा के परिजनों को न्याय दिलाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है। मामले की जांच अब CID और SIT के संयुक्त प्रयास से आगे बढ़ेगी, जिससे केस की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। वहीं, समाज में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने की मांग भी तेज हो गई है।
NEET student rape case : पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की छात्रा के साथ हुए कथित रेप और मौत के मामले में जांच में बड़ा मोड़ आया है। SSP ने इस गंभीर घटना के बाद चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई को प्रशासन की सख्ती और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
घटना के बाद पुलिस प्रशासन और SIT लगातार जांच में जुटा हुआ था। इसी बीच फॉरेंसिक टीम ने शनिवार को SIT को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म की पुष्टि की गई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से रेप की पुष्टि की गई है, जो इस केस को और गंभीर बना देती है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट आने से पहले SIT की टीम ने पांच बार जहानाबाद जाकर पीड़िता के परिवार से पूछताछ की। जांच के दौरान परिवार के सदस्यों के साथ-साथ छात्रा के पिता, ममेरे भाई, ऑटो ड्राइवर और कुछ युवकों से थाने में 3-3 घंटे तक पूछताछ की गई। जांच के दौरान कई सवालों के जवाब तलाशे गए और घटनाक्रम की पड़ताल की गई।
अब इस मामले में ताजा अपडेट यह है कि SIT की जांच के बाद पहली बार CID की एंट्री हुई है। CID की टीम ने मामले की गहनता और संवेदनशीलता को देखते हुए FSL के डायरेक्टर बिपिन चौधरी के नेतृत्व में अपने दल बल के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल में पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। CID की इस एंट्री को मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
CID की टीम हॉस्टल में सील किए गए कमरों, संभावित सबूतों और संदिग्ध स्थानों की जांच कर रही है। साथ ही CCTV फुटेज, फिंगरप्रिंट, डोर हैंडल, बालों और अन्य फॉरेंसिक सबूतों की पड़ताल की जा रही है। टीम के साथ FSL विशेषज्ञ भी मौजूद हैं, जो स्थल पर ही जांच के दौरान उपलब्ध सबूतों की प्रामाणिकता और सही तरीके से संकलन सुनिश्चित कर रहे हैं।
इस बीच प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हॉस्टल के संचालकों और स्टाफ के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की बात कही है। छात्रा के परिजनों को न्याय दिलाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है। मामले की जांच अब CID और SIT के संयुक्त प्रयास से आगे बढ़ेगी, जिससे केस की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। वहीं, समाज में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने की मांग भी तेज हो गई है।