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NEET student death : पटना कोर्ट ने नीट छात्रा मौत मामले में हॉस्टल मालिक की जमानत खारिज, जानिए SIT जांच का क्या है नया अपडेट

पटना की अदालत ने नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद छात्रा की मौत मामले में हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अब जांच और चार्जशीट पर नजर है।

23-Jan-2026 09:50 AM

By First Bihar

NEET student death : नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की रहस्यमयी मौत के मामले में पटना की अदालत ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया है। चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के एक हॉस्टल से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत ने हॉस्टल के मालिक की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।


पटना सिविल कोर्ट की प्रथम श्रेणी की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कुमारी प्रिंकी प्रियंका ने मामले की सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन को जमानत देने से इंकार कर दिया। इसका मतलब है कि अब मनीष रंजन को जेल में ही रहना होगा।


यह मामला 9 जनवरी को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। मृतका के पिता के फर्द बयान पर चित्रगुप्त नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसी के आधार पर पुलिस ने मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया था। 15 जनवरी 2026 को गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में है। इस मामले में अब तक यह एकमात्र गिरफ्तारी है।


फरियादी पिता के अनुसार, उसकी बेटी को हॉस्टल के कमरे में बेहोशी की हालत में पाया गया था। पिता ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी के शरीर पर चोट के निशान थे। साथ ही उन्होंने दुष्कर्म के प्रयास का भी शक जताया है। गंभीर हालत में छात्रा को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसके निजी अंगों पर चोट के प्रमाण मिले हैं।


जांच एजेंसियां हर पहलू से मामले की पड़ताल में जुटी हैं। पुलिस और अन्य जांच टीमें तथ्य-परक सबूत जुटाने, हॉस्टल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही हैं। इस बीच कोर्ट का यह फैसला पीड़ित परिवार की उम्मीदों को मजबूत करता है।


अब सभी की नजरें आगे की जांच और चार्जशीट पर टिकी हैं। जांच और चार्जशीट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रा की मौत के पीछे का सच क्या है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में और भी लोग फंस सकते हैं, जबकि सच्चाई अलग भी निकल सकती है। फिलहाल अदालत के इस निर्णय से यह संदेश गया है कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।