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09-Jan-2026 12:13 PM
By First Bihar
Land for Job Scam : दिल्ली की सीबीआई स्पेशल राउज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने शुक्रवार को आदेश सुनाते हुए लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पुत्र तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव समेत कुल 46 आरोपियों के विरुद्ध मुकदमे को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
कोर्ट के आदेश में बेहद सख्त टिप्पणियां की गईं। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जज विशाल गोगने ने कहा कि चार्जशीट से यह स्पष्ट होता है कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य एक “क्रिमिनल एंटरप्राइज” यानी आपराधिक उपक्रम चला रहे थे। अदालत ने कहा कि सभी आरोपी एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे, जिसके तहत सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति हासिल की गई। जज ने टिप्पणी की कि रेलवे मंत्रालय का इस्तेमाल निजी जागीर की तरह किया गया और लालू यादव के करीबी लोगों ने जमीन के बदले रेलवे में नौकरियां दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
अदालत ने यह भी साफ किया कि आरोपियों की ओर से दायर की गई बरी होने की याचिकाएं पूरी तरह अनुचित हैं। कोर्ट का मानना है कि उपलब्ध साक्ष्य और चार्जशीट में दर्ज तथ्यों के आधार पर इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसी के साथ अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए।
गौरतलब है कि लैंड फॉर जॉब घोटाला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी समेत विभिन्न पदों पर नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। यह जमीन बाद में लालू परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम ट्रांसफर कराई गई। सीबीआई का कहना है कि इस पूरे मामले में सुनियोजित तरीके से नियमों की अनदेखी की गई और सरकारी पदों का दुरुपयोग हुआ।
सीबीआई की चार्जशीट में दावा किया गया है कि लालू यादव के प्रभाव और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर कई लोगों को नौकरी दिलाई गई, जबकि इसके बदले में उन्हें या उनके परिवार के सदस्यों को जमीन के रूप में लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह लेन-देन सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के दायरे में आता है।
अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे कानून की जीत बताया है, जबकि राजद की ओर से अब तक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया जाता रहा है। हालांकि, कोर्ट के आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और इन पर विस्तृत सुनवाई जरूरी है।
अब आरोप तय होने के बाद इस मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी, जिसमें अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और सबूतों को पेश करेगा। वहीं, बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। यह मामला न केवल लालू परिवार के लिए कानूनी तौर पर अहम है, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस केस की सुनवाई और अदालत की आगे की टिप्पणियों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।