Bihar news: जमुई सदर अस्पताल में एक गंभीर दुर्घटना सामने आई है, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों की कथित लापरवाही के कारण एक घायल युवक की मौत हो गई। घटना शनिवार को मरीज वार्ड में हुई। मृतक की पहचान 35 वर्षीय संतोष कुमार के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, संतोष कुमार पटना जिले के बाढ़ थाना अंतर्गत सरनटांड गांव के निवासी थे। वह छठ पूजा के मौके पर अपने घर बाढ़ जा रहे थे और रास्ते में जमुई रेलवे स्टेशन के मलयपुर सिग्नल के पास ट्रेन से गिर गए थे। इस दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। रेल पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत जमुई सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हालांकि अस्पताल लाए जाने के बाद भी संतोष की जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल के मरीज वार्ड में भर्ती होने के बाद, संतोष किसी कारणवश अपने बेड से फर्श पर गिर गए। उस समय वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें उठाने या सहायता देने में कथित तौर पर लापरवाही बरती। परिणामस्वरूप, संतोष फर्श पर घंटों तक तड़पते रहे।
संतोष की वृद्ध मां, विनेश्वरी देवी, जो अस्पताल में मौजूद थीं, उन्होंने बार-बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। अस्पताल में मौजूद कर्मियों की इस लापरवाही ने न केवल परिवार को गहरा दुख दिया बल्कि स्थानीय लोगों में भी आक्रोश फैलाया है।
स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त कर्मी होने के बावजूद संतोष को समय पर मदद नहीं दी गई। इस घटना से यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों के प्रति सचेत रहकर उनकी देखभाल की जा रही है।
संतोष कुमार के परिजन बताते हैं कि वह अपने घर बाढ़ जा रहे थे, जहां वे अपनी बहन के घर रहकर छठ पूजा मनाने वाले थे। अचानक हुई ट्रेन हादसे के बाद अस्पताल पहुंचने पर उन्हें सही समय पर इलाज नहीं मिल पाया। उनके परिवार का कहना है कि अगर स्वास्थ्यकर्मियों ने समय पर सहायता दी होती तो शायद संतोष की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद से परिवार में मातम पसरा है। संतोष की मां विनेश्वरी देवी अत्यंत दुखी हैं और उन्होंने प्रशासन से न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की जान अस्पताल में कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गई है, और इस मामले की गंभीर जांच होनी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारी इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने किस प्रकार की लापरवाही बरती और क्यों समय रहते घायल युवक को सहायता नहीं दी गई।
जमुई के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों की देखभाल में लापरवाही गंभीर मामला है। ऐसे मामलों से न केवल मरीज की जान को खतरा होता है बल्कि अस्पताल की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। इसके साथ ही यह घटना बिहार में सरकारी अस्पतालों में मरीज सुरक्षा और स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करती है।
स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन भी इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं कि वह इस मामले में उचित कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय करे।
इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और समय पर देखभाल कितनी महत्वपूर्ण है। अगर सही समय पर कदम उठाए जाते, तो शायद संतोष कुमार अपनी जान बचा सकते थे।
घटना ने न केवल परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, बल्कि पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। लोगों की मांग है कि इस मामले में दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
संतोष कुमार की दुखद मौत स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में सुधार की जरूरत को उजागर करती है। यह घटना एक चेतावनी भी है कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।
इस प्रकार, जमुई सदर अस्पताल में हुई इस घटना ने स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मृतक संतोष कुमार की तड़पती हुई मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और उनके परिवार की पीड़ा को बढ़ा दिया है।