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09-Oct-2025 11:42 AM
By First Bihar
BIHAR NEWS : अब थाने में शिकायत दर्ज कराने पर एफआईआर की कॉपी शिकायतकर्ता की अपनी भाषा में उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पहले यह सुविधा केवल हिंदी, अंग्रेजी और राज्य की कुछ क्षेत्रीय भाषाओं तक सीमित थी। एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के निदेशक आईपीएस आलोक रंजन ने इस बदलाव के निर्देश बिहार सहित सभी राज्यों की पुलिस को भेजे हैं।
निर्देश के अनुसार, जब कोई व्यक्ति थाने में एफआईआर दर्ज कराने आएगा, तो उससे पूछा जाएगा कि वह एफआईआर की कॉपी किस भाषा में चाहते हैं। उनकी इच्छित भाषा के अनुसार ही एफआईआर की कॉपी उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी। कुल 23 भाषाओं में यह सुविधा मिलेगी। इन भाषाओं में हिंदी और अंग्रेजी के साथ मैथिली, संथाली, नेपाली, असमी, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगू और उर्दू शामिल हैं।
एनसीआरबी ने जिलों के एसपी और सभी रेंज के आईजी एवं डीआईजी को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश भी दिए हैं कि शिकायतकर्ता को उनकी पसंदीदा भाषा में एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराई जाए। इसका उद्देश्य पुलिस और आम जनता के बीच संवाद को और सरल बनाना है, ताकि भाषा की बाधा किसी भी व्यक्ति के लिए समस्या न बने।
थानों में सीसीटीएनएस (कंप्यूटराइज्ड क्राइम और कानून प्रवर्तन नेटवर्क सिस्टम) के तहत ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने की सुविधा पहले से उपलब्ध है। इसके साथ ही एनसीआरबी ने क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (क्राई-मैक) के तहत एआई आधारित भाषा अनुवादक ‘भाषिणी’ विकसित किया है। यह प्रणाली एफआईआर को 23 भाषाओं में तुरंत अनुवादित कर सकती है।
भाषिणी को क्राई-मैक की वेबसाइट पर ओपन करने के बाद सभी भाषाओं का विकल्प दिखाई देता है। किसी भी भाषा पर क्लिक करते ही एफआईआर का अनुवाद उस भाषा में हो जाता है। इसके बाद थाने की पुलिस तुरंत उस अनूदित कॉपी का प्रिंट निकालकर शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और आसान है, जिससे थानों में एफआईआर के अनुवाद में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी।
एनसीआरबी के अनुसार, क्राई-मैक की यह सुविधा पहले से सभी थानों को उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसलिए अब एफआईआर का अनुवाद करना बहुत आसान हो गया है और इससे भाषा की वजह से किसी शिकायतकर्ता को असुविधा नहीं होगी। इससे न केवल न्याय तक पहुँच आसान होगी, बल्कि पुलिस की पारदर्शिता और शिकायतकर्ता की संतुष्टि भी बढ़ेगी।
इस नई पहल के माध्यम से बिहार समेत पूरे देश में पुलिसिंग में तकनीकी और भाषाई सुधार का एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब किसी भी व्यक्ति को अपनी मातृभाषा में एफआईआर मिल सकेगी, जिससे न्याय प्रक्रिया में भरोसा और विश्वास दोनों बढ़ेंगे।