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Bihar Folk Dance : डोमकच नृत्य शैली के लिए बिहार को मिला पद्म श्री, लोकसंस्कृति को मिला राष्ट्रीय सम्मान

डोमकच नृत्य शैली को राष्ट्रीय सम्मान मिला—बिहार के लोक कलाकार को पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति को नई पहचान देता है।

25-Jan-2026 02:52 PM

By First Bihar

Bihar Folk Dance : बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति के लिए यह एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है। राज्य की पारंपरिक डोमकच नृत्य शैली को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। डोमकच लोकनृत्य के संरक्षण और प्रचार–प्रसार में जीवन समर्पित करने वाले एक वरिष्ठ लोक कलाकार को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। इस सम्मान के साथ ही बिहार की लोक परंपराओं को देश–दुनिया में नई पहचान मिली है।


डोमकच नृत्य मुख्य रूप से बिहार के मिथिला और आसपास के इलाकों में प्रचलित एक पारंपरिक लोकनृत्य है। यह नृत्य विवाह, उपनयन संस्कार और अन्य मांगलिक अवसरों पर महिलाओं द्वारा समूह में किया जाता है। ढोलक, मंजीरा और लोकगीतों की मधुर धुन पर किया जाने वाला डोमकच नृत्य सामाजिक एकता, पारिवारिक खुशी और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक माना जाता है।


लोकसंस्कृति को मिला सम्मान

पद्म श्री सम्मान मिलने से न सिर्फ उस कलाकार का, बल्कि पूरे बिहार का मान बढ़ा है। लंबे समय तक लोकनृत्य को हाशिये पर रखा गया, लेकिन आज सरकार और समाज दोनों ही यह मानने लगे हैं कि लोककला ही हमारी असली पहचान है। डोमकच नृत्य के लिए यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण अंचलों में पनपी कलाएं भी राष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बना सकती हैं।


पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा

डोमकच नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही सामाजिक विरासत है। इसमें महिलाओं की सहभागिता विशेष होती है। गीतों के माध्यम से पारिवारिक जीवन, सामाजिक संबंधों और लोक विश्वासों को अभिव्यक्त किया जाता है। यही कारण है कि डोमकच नृत्य आज भी गांवों में जीवंत रूप में मौजूद है।


कलाकारों में खुशी की लहर

पद्म श्री सम्मान की घोषणा के बाद बिहार के लोक कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कलाकारों का कहना है कि इससे नई पीढ़ी को लोकनृत्य सीखने और अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, सरकार और संस्थानों का ध्यान लोककलाओं के संरक्षण की ओर और अधिक जाएगा।


युवाओं के लिए प्रेरणा

डोमकच नृत्य को मिला यह सम्मान युवाओं के लिए भी एक संदेश है कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें। आधुनिकता की दौड़ में लोकसंस्कृति को भूलना हमारी पहचान को कमजोर करता है। पद्म श्री जैसे सम्मान यह साबित करते हैं कि पारंपरिक कलाओं में भी भविष्य और सम्मान दोनों हैं।


बिहार की सांस्कृतिक पहचान मजबूत

यह सम्मान बिहार की सांस्कृतिक छवि को और मजबूत करता है। इससे पहले भी बिहार की लोकगायिका, चित्रकला और अन्य लोक विधाओं को राष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है। अब डोमकच नृत्य के माध्यम से एक बार फिर बिहार ने देश को अपनी सांस्कृतिक समृद्धि का अहसास कराया है। कुल मिलाकर, डोमकच नृत्य शैली के लिए मिला पद्म श्री सम्मान बिहार के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की लोकसंस्कृति और परंपराओं की जीत है।