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20-Jan-2026 08:53 AM
By First Bihar
chara ghotala : चारा घोटाले के 28 साल पुराने मामले में एक बार फिर से अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की रिकवरी के लिए कार्रवाई तेज हो गई है। इस मामले में कुल 11 रिवोकेशन केस की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में शुरू हो चुकी है। यह वही मामले हैं जो पहले पटना स्थित सीबीआई कोर्ट में लंबित थे। लंबे समय से चल रहे इन मामलों की सुनवाई को पटना हाईकोर्ट ने आगे बढ़ाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट को भेज दिया था।
झारखंड हाईकोर्ट ने इन सभी केसों को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश (SPCJ) ए. के. तिवारी की अदालत में सुनवाई के लिए भेजा है। दिसंबर महीने में सभी मामलों पर नए सिरे से रिवोकेशन संख्या जारी की गई थी। इसके बाद अब इन 11 केसों की सुनवाई प्रारंभ हो चुकी है।
इन मामलों की पहली सुनवाई के बाद अदालत ने दूसरे पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब आरोपियों और उनके परिवारों द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को वापस लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। चारा घोटाला, जो 1990 के दशक में सामने आया था, में चाईबासा, गोड्डा, हजारीबाग और साहिबगंज कोषागार से चारा की अवैध निकासी और धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज था। इस घोटाले में कई अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों के नाम सामने आए थे। वर्षों से चल रहे इस मामले में आरोपी या दोषी व्यक्तियों ने अपने अपराध से अर्जित संपत्तियों को अपने नाम या परिजनों के नाम पर दर्ज करा रखा था।
इन अवैध संपत्तियों में जमीन, घर, दुकान, प्लॉट, बैंक में जमा राशि और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि कई संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं, लेकिन आरोपियों ने उन्हें अपने नाम या कानूनी वारिसों के नाम पर ट्रांसफर करा लिया था। अब अदालत के आदेश के बाद इन संपत्तियों को रिकवर करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेष रूप से चारा घोटाले के मामलों में रिवोकेशन (रद्दीकरण) प्रक्रिया का मतलब है कि कोर्ट द्वारा पहले से दिए गए आदेशों, रिहाई, या किसी प्रकार के लाभ को वापस लेना। यह प्रक्रिया इसलिए आवश्यक होती है क्योंकि पहले कई मामलों में आरोपियों को कुछ राहत मिल चुकी थी या संपत्तियों को उनके नाम पर रखने की अनुमति मिल गई थी। अब अदालत ने पुन: समीक्षा कर यह तय किया है कि इन संपत्तियों को सरकार के कब्जे में लिया जाए।
सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियां अपने सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर यह साबित करेंगी कि ये संपत्तियां आरोपियों द्वारा किए गए अपराध से अर्जित की गई थीं। इसके बाद अदालत इन संपत्तियों को रिवोकेशन के आदेश के तहत सरकार को हस्तांतरित करने का आदेश दे सकती है। इस कदम को लेकर भ्रष्टाचार और सरकारी धन की हेराफेरी के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। क्योंकि लंबे समय तक मामलों की देरी के कारण आरोपियों ने अपनी संपत्तियों को सुरक्षित कर लिया था। अब अदालत द्वारा रिवोकेशन केस की सुनवाई शुरू होने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकारी धन को वापस लाने की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जा रहा है।
चारा घोटाले से जुड़े मामले का इतिहास भी काफी लंबा है। 1990 के दशक में चारा कोषागार से अवैध निकासी और धन का गबन करके उसे निजी संपत्ति में बदलने का आरोप सामने आया था। इस मामले में कई अधिकारियों और राजनीतिक लोगों के नाम भी जुड़े थे। हालांकि समय के साथ मामलों में देरी और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण आरोपियों को राहत मिलती रही।
अब जब झारखंड हाईकोर्ट ने इन मामलों को पुनर्जीवित किया है, तो यह साफ संकेत है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुकदमों में देरी की संस्कृति को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।आगे की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि आरोपियों द्वारा अर्जित संपत्तियां किस हद तक अपराध से जुड़ी हैं और उन्हें किस प्रकार सरकार के कब्जे में लिया जा सकता है। यदि अदालत इन संपत्तियों को रिकवर करने का आदेश देती है तो यह न केवल सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ समाज में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
चारा घोटाले से जुड़ी 28 साल पुरानी संपत्ति रिकवरी की प्रक्रिया अब नए सिरे से शुरू हो चुकी है। 11 रिवोकेशन केस की सुनवाई से यह उम्मीद बढ़ गई है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों को वापस सरकार के कब्जे में लाया जा सकेगा। अदालत के फैसले के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिलने की संभावना है।