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07-Jan-2026 12:29 PM
By First Bihar
Bihar land cases : बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में अब किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े और अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री ने हाल ही में ताबड़तोड़ आदेश जारी कर अपनी स्पष्ट नीति लोगों के सामने रख दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट शेयर कर साफ कर दिया कि जमीन माफिया, दलाल और फर्जी दस्तावेज देने वाले अब सुरक्षित नहीं रहेंगे।
मंत्री विजय सिन्हा ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट के जरिए यह साफ किया कि निजी या रैयती जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत जांच कर एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पहले से किसी फर्जी दस्तावेज पर आदेश जारी हो चुका है, तो उसकी कानूनी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, FIR दर्ज नहीं करना या किसी मामले को दबाना गंभीर लापरवाही और कदाचार माना जाएगा, और ऐसी स्थिति में संबंधित अंचलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की कूटरचना, फर्जी दस्तावेज का निर्माण या उपयोग, छल और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराएं लागू की जाएंगी। यह कदम सुशासन, पारदर्शिता और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है। विजय सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार अब किसी भी जमीन माफिया को बख्शने वाली नहीं है और सभी को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
एक अन्य पोस्ट में मंत्री ने यह भी बताया कि अब जमीन के मामलों में फर्जीवाड़े की कोई जगह नहीं है। इसके तहत नामांतरण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, बंदोबस्ती, सीमांकन, भू-अर्जन और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में फर्जी दस्तावेज पाए जाने पर तुरंत आपराधिक कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाली दस्तावेज देने वाले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत FIR दर्ज की जाएगी और फर्जी कागजात के आधार पर कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में जमीन माफियाओं और दलालों के खिलाफ एक मास्टर स्ट्रोक की तरह है। लंबे समय से बिहार में जमीन विवाद और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अनियमितताएं एक बड़ी समस्या बन चुकी थीं। इन नए आदेशों से आम जनता को भी राहत मिलेगी और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि अब प्रत्येक अंचलाधिकारी को जमीन से जुड़े मामलों में पूरी निगरानी रखनी होगी। किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी। यह कदम बिहार में सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्री विजय सिन्हा के इस ऐलान के बाद जमीन माफियाओं और दलालों में हड़कंप मचा हुआ है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेज बनाकर या उपयोग करके सुरक्षित नहीं रह सकता। इस नीति से न केवल जमीन माफियाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगेगा, बल्कि आम जनता के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।
बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में यह एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे पहले अक्सर फर्जी दस्तावेज और अनियमितताओं के कारण आम जनता परेशान रहती थी, लेकिन अब राज्य सरकार की सख्त नीति से इस दिशा में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।