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19-Feb-2026 11:55 AM
By First Bihar
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में खाद की कालाबाजारी का मुद्दा एक बार फिर जोरदार तरीके से उठा। नरकटिया के विधायक विशाल कुमार ने सदन में किसानों की समस्याओं को उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में खाद, खासकर यूरिया की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है और इसमें पदाधिकारियों तथा डीलरों की मिलीभगत शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान अब भी परेशान हैं और उन्हें निर्धारित दर पर खाद नहीं मिल पा रही है।
विशाल कुमार ने सदन में कुछ पदाधिकारियों के नाम भी लिए और मांग की कि उनके मोबाइल लोकेशन की जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे किन डीलरों के संपर्क में रहते हैं। उनका कहना था कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक कालाबाजारी पर रोक लगाना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर खाद की कृत्रिम किल्लत पैदा कर किसानों से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं।
इस पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह बात सच है कि बिहार में कालाबाजारी होती है। लेकिन विभाग इस पर एक्शन ले रहा है। वर्ष 2025-26 में खरीफ और रबी फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध करा दी गई है। मंत्री ने दावा किया कि जरूरत से अधिक यूरिया की आपूर्ति की गई है ताकि किसी भी स्थिति में किसानों को दिक्कत न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कालाबाजारी को लेकर गंभीर है और इस पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
मंत्री ने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले में 12 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है और 19 लोगों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। पूरे बिहार में अब तक 419 लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं तथा 104 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध हो। यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बहस के दौरान बीजेपी विधायक नीरज कुमार ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन उसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने मांग की कि निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए तथा वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए।
सदन में इस मुद्दे पर काफी देर तक चर्चा होती रही। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, लेकिन एक बात साफ रही कि खाद की उपलब्धता और कालाबाजारी का मुद्दा किसानों से जुड़ा संवेदनशील विषय है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता ही तय करेगी कि किसानों को वास्तव में राहत मिलती है या नहीं।