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04-Dec-2025 07:34 AM
By First Bihar
Bihar Vidhansabha news : बिहार विधानसभा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिससे विधानमंडल के दोनों सदनों—विधानसभा और विधान परिषद—के सदस्यों को सीधा लाभ मिलने जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में ‘बिहार विधान मंडल (सदस्यों का वेतन, भत्ता और पेंशन) संशोधन नियमावली 2025’ की प्रति पटल पर रखी, जिसमें टेलीफोन भत्ता से जुड़ा अहम प्रावधान जोड़ा गया है।
नए संशोधन के अनुसार अब बिहार विधानसभा और विधान परिषद के प्रत्येक सदस्य को हर महीने 8300 रुपये टेलीफोन उपयोग के लिए दिए जाएंगे। खास बात यह है कि इस राशि के उपयोग के लिए किसी भी प्रकार का वाउचर जमा करने की जरूरत नहीं होगी। सदस्य अपने मोबाइल या टेलीफोन का उपयोग कितनी भी संख्या में कर सकते हैं और इस भत्ते का उपभोग अपनी सुविधा अनुसार कर पाएंगे।
नई नियमावली में क्या बदलाव?
पहले सदस्यों को फोन बिल के लिए वाउचर/बिल जमा करने होते थे, जिसके आधार पर राशि प्रतिपूर्ति की जाती थी। इससे कई बार सदस्यों को बिलों की जांच, स्वीकृति और पुनर्भुगतान की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। नई व्यवस्था इस प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर देती है। अब सदस्यों को सीधा निश्चित राशि दी जाएगी, जिसका उपयोग वे अपने कार्यालय कार्य, जनसंपर्क या व्यक्तिगत टेलीफोनिक व्यवस्थाओं में कर सकेंगे।
सरकार का तर्क: सुविधा और पारदर्शिता
संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह संशोधन सदस्यों को बेहतर सुविधा प्रदान करने और प्रक्रियात्मक झंझटों को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। उनके मुताबिक, एक निश्चित राशि तय कर देने से न केवल प्रतिपूर्ति प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि वाउचर आधारित प्रणाली में होने वाली देरी और प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सदस्य अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप चाहे जितने भी टेलीफोन नंबरों का उपयोग कर सकते हैं। 8300 रुपये की यह राशि किसी एक नंबर या एक बिल से बंधी नहीं होगी, बल्कि सदस्यों की संचार संबंधी संपूर्ण आवश्यकताओं के लिए एक समेकित भत्ता के रूप में उपलब्ध होगी।
सदस्यों में संतोष, सुविधा में बढ़ोतरी
नियमावली में संशोधन की जानकारी मिलते ही कई सदस्यों ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया। उनका कहना है कि वर्तमान समय में जनप्रतिनिधियों के कार्य में अधिकांश संचार मोबाइल और इंटरनेट पर आधारित है। अक्सर उन्हें कई नंबरों का उपयोग करना पड़ता है—कुछ जनता के लिए, कुछ कार्यालय कार्यों के लिए और कुछ व्यक्तिगत संपर्क के लिए। ऐसे में वाउचर जमा करने की पुरानी व्यवस्था काफी जटिल बनी रहती थी। अब यह निश्चित राशि मिलने से उन्हें न केवल सुविधा होगी, बल्कि फोन उपयोग की स्वतंत्रता भी बढ़ेगी।
टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग के अनुरूप निर्णय
बिहार जैसे बड़े राज्य में जनप्रतिनिधियों को लगातार अपने क्षेत्रों में जनता से संवाद बनाए रखना पड़ता है। अधिकारियों, पार्टी नेताओं और आम जनता के साथ निरंतर संपर्क में रहने के कारण संचार खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ चुका है। नई नियमावली इस तकनीकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। कई सदस्य व्हाट्सएप कॉल, इंटरनेट आधारित सर्विसेज, वीडियो कॉलिंग और अन्य संचार माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में एकल वाउचर प्रणाली व्यवहारिक नहीं रह गई थी।
सूत्रों के अनुसार, सरकार आगामी सत्रों में अन्य भत्तों—जैसे यात्रा भत्ता, कार्यालय व्यय भत्ता आदि—की भी समीक्षा कर सकती है। सरकार का प्रयास है कि जनप्रतिनिधियों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकें।