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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र शुरू, नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण और अध्‍यक्ष चुनाव तय; जानिए सदन में इस बार क्या-क्या होगा

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू, पहले दिन नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण, दूसरे दिन अध्‍यक्ष का चुनाव और राज्यपाल का अभिभाषण होगा।

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र शुरू, नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण और अध्‍यक्ष चुनाव तय; जानिए सदन में इस बार क्या-क्या होगा

01-Dec-2025 10:29 AM

By First Bihar

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज यानी 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो गया है। यह सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा और इसमें कई अहम कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। पहले दिन सत्र की शुरुआत नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह के साथ होगी। विधानसभा के सदन में नई सरकार के गठन और विधायकों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया राज्य की राजनीति में हमेशा ही विशेष महत्व रखती है।


पहले दिन के कार्यक्रम में विधानसभा प्रोटेम स्पीकर द्वारा विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण विधायकों के लिए संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके बिना वे सदन में औपचारिक रूप से भाग नहीं ले सकते। शपथ ग्रहण समारोह में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता, विधायकों के परिजन और आमतौर पर राज्य के उच्च अधिकारियों की उपस्थिति रहती है।


पहले दिन के शपथ ग्रहण कार्यक्रम के पूरा होने के बाद, यह प्रक्रिया अगले दिन के पहले हाफ तक जारी रहेगी। इस दौरान नए विधायकों को संवैधानिक शपथ दिलाई जाएगी, जिसमें वे विधायकों के रूप में अपने कर्तव्यों और दायित्वों का पालन करने का संकल्प लेते हैं। यह एक पारंपरिक और औपचारिक प्रक्रिया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है।


सत्र के दूसरे दिन के दूसरे हाफ में विधानसभा के अध्यक्ष का चुनाव होगा। अध्‍यक्ष का चुनाव विधानसभा में सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अध्‍यक्ष सदन में सभी राजनीतिक दलों के बीच संतुलन बनाए रखने, नियमों के अनुसार कार्यवाही करवाने और बहस के दौरान अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं।


इसके बाद, सत्र के तीसरे दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा। यह अभिभाषण सरकार की नीतियों, आगामी योजनाओं और प्रदेश की विकास यात्रा पर प्रकाश डालता है। राज्यपाल का अभिभाषण विधानसभा में आगामी वर्ष के लिए कार्ययोजना का मार्गदर्शन करने का कार्य करता है और इसके बाद सदन में उसके ऊपर बहस और वाद-विवाद शुरू होता है। यह बहस आमतौर पर दो दिनों तक चलती है, जिसमें विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों अपनी-अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव रखते हैं।


इसके अतिरिक्त, इस सत्र में अनुपूरक बजट पेश करने की संभावना भी है। अनुपूरक बजट का मतलब है कि सरकार को पहले से अनुमोदित बजट में किसी विशेष आवश्यकता या आपात स्थिति के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होने पर इसे पेश किया जाता है। यह बजट राज्य सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


इस शीतकालीन सत्र का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह नई सरकार के लिए अपने प्राथमिक कार्यों की दिशा तय करने का समय होता है। नवनिर्वाचित विधायक न केवल अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास कार्यों पर ध्यान देंगे, बल्कि राज्य के समग्र विकास और प्रशासनिक सुधारों में भी अपनी भूमिका निभाएंगे।


इस सत्र में विधानसभा की कार्यवाही पारदर्शिता और अनुशासन के साथ होगी। शपथ ग्रहण, अध्‍यक्ष का चुनाव, राज्यपाल का अभिभाषण और बजट प्रस्तुतिकरण जैसे कार्यक्रम सदन की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगे।


इस प्रकार, बिहार विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र न केवल नवनिर्वाचित विधायकों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की राजनीति और प्रशासनिक दिशा को भी प्रभावित करेगा। शपथ ग्रहण से लेकर बजट प्रस्तुति तक, हर कार्यक्रम राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती और विधायकों की जिम्मेदारियों की याद दिलाने वाला है।