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Bihar Assembly nomination : बिहार विधानसभा सदस्यों के विश्वविद्यालयों और बोर्डों में निर्वाचन की प्रक्रिया बदली, अब होगा मनोनयन; स्पीकर को मिला फुल पावर

बिहार विधानसभा ने विश्वविद्यालयों की सीनेट और विभिन्न बोर्डों में प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया बदल दी है। अब चुनाव के बजाय विधानसभा अध्यक्ष मनोनयन करेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल और तेज होगी।

Bihar Assembly nomination : बिहार विधानसभा सदस्यों के विश्वविद्यालयों और बोर्डों में निर्वाचन की प्रक्रिया बदली, अब होगा मनोनयन; स्पीकर को मिला फुल पावर

04-Dec-2025 07:54 AM

By First Bihar

Bihar Assembly nomination : बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों की सीनेट तथा कई बोर्डों में विधानसभा सदस्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर अब तक लागू निर्वाचन प्रणाली में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब इन संस्थाओं में सदस्यों का चुनाव नहीं होगा, बल्कि उनका मनोयन (नॉमिनेशन) किया जाएगा। इसके लिए बिहार विधानसभा अध्यक्ष को अधिकृत कर दिया गया है।


संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में इस आशय का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे चर्चा के बाद मंजूरी प्रदान कर दी गई। मंत्री ने कहा कि यह बदलाव प्रशासनिक सुगमता, संस्थागत कार्यों की निरंतरता और समय पर पदों का भराव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।


उन्होंने बताया कि अब तक विश्वविद्यालयों की सीनेट तथा विभिन्न शिक्षा और चिकित्सा बोर्डों में विधानसभा के सदस्यों को निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से भेजा जाता था। यह प्रक्रिया समय लेने वाली होने के साथ-साथ कई बार किसी कारण से लंबित भी रह जाती थी। इसके कारण सदस्यों के चयन में विलंब होता था और संबंधित संस्थाओं के कार्य प्रभावित होते थे।


संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि नए प्रस्ताव के तहत अब विधानसभा अध्यक्ष न केवल इन पदों के लिए सदस्यों का चयन करेंगे, बल्कि यह अधिकार विधिवत उन्हें सौंप दिया गया है। सदन ने इस प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन किया और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। नई व्यवस्था के तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों में भेजे जाने वाले 10 सीनेट सदस्यों का मनोनयन विधानसभा अध्यक्ष करेंगे। इनमें सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं। 


प्रस्ताव के अनुसार—

1 सदस्य अनुसूचित जाति (SC)

1 सदस्य अनुसूचित जनजाति (ST)

3 सदस्य अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से मनोनीत किए जाएंगे।


इसके अलावा कृषि विश्वविद्यालय की सीनेट में भी 7-7 सदस्यों का मनोयन किया जाएगा, जिसके लिए भी अध्यक्ष को अधिकार दिया गया है।


विभिन्न परिषदों और बोर्डों के लिए भी मनोयन

विधानसभा अध्यक्ष को मिले अधिकार केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं हैं। प्रस्ताव में राज्य के कई महत्वपूर्ण बोर्डों और परिषदों में भी विधानसभा सदस्यों के मनोनयन के अधिकार का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

बिहार राज्य होम्योपैथिक चिकित्सा बोर्ड – 2 सदस्य

राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा परिषद – 3 सदस्य

बिहार राज्य भूमि सुधार आयोग – 5 सदस्य

बिहार मदरसा शिक्षा बोर्ड – 2 सदस्य

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड – 2 सदस्य

निशक्त सामान अवसर अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी अधिनियम 1955 के तहत राज्य स्तरीय समन्वय समिति – 2 सदस्य


इन सभी निकायों में अब निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर मनोनीत सदस्य भेजे जाएंगे, जिनका चयन सीधे विधानसभा अध्यक्ष करेंगे। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालयों और बोर्डों में प्रतिनिधि चुनने की पुरानी पद्धति कई बार व्यावहारिक चुनौतियों से घिरी रहती थी। नई व्यवस्था से इन समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। मनोयन प्रक्रिया सरल और तत्काल प्रभाव से लागू होने वाली व्यवस्था है, जिससे संस्थाओं के संचालन में निरंतरता बनी रहेगी।


विजय कुमार चौधरी द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर सदन में चर्चा की गई। कई सदस्यों ने इसे समयानुकूल और व्यवस्थागत रूप से आवश्यक कदम बताया। इसके बाद सदन ने सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष को मनोनयन संबंधी अधिकार देने का निर्णय पारित कर दिया।सदन द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष संबंधित नियमों के अनुसार पात्र सदस्यों का चयन करेंगे। इसके बाद इन नामों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।


नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही अब इन बोर्डों और विश्वविद्यालयों में प्रतिनिधित्व के लिए चुनाव नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया मनोनयन आधारित होगी। सदन द्वारा अधिकृत किए जाने के बाद अब यह जिम्मेदारी पूरी तरह से विधानसभा अध्यक्ष पर होगी कि वे पात्रता और सामाजिक संतुलन का ध्यान रखते हुए सदस्यों का चयन करें।