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Bihar land records : बिहार में अब अनस्कैन जमीन दस्तावेज भी ऑनलाइन होंगे उपलब्ध, GIS से रजिस्ट्री होगी सटीक वेरिफिकेशन

बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब भू-अभिलेख पोर्टल पर वे भी दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होंगे जो पहले स्कैन नहीं थे। नागरिक ऑनलाइन स्कैनिंग का अनुरोध कर सकते हैं, और अंचल अधिकारी उन दस्तावेजों को

Bihar land records : बिहार में अब अनस्कैन जमीन दस्तावेज भी ऑनलाइन होंगे उपलब्ध, GIS से रजिस्ट्री होगी सटीक वेरिफिकेशन

26-Jan-2026 11:52 AM

By First Bihar

Bihar land records : बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है। इसी कड़ी में अब राज्य में जमीन के राजस्व अभिलेखों को लेकर एक नई सुविधा शुरू की गई है, जिससे लोगों को ऑनलाइन जानकारी और सुविधा मिल सकेगी। अब जो राजस्व दस्तावेज पोर्टल पर स्कैन करके उपलब्ध नहीं होते, उनके लिए भी लोग ऑनलाइन अनुरोध कर सकते हैं और दस्तावेज़ों की डिजिटल कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।


नई सुविधा: अनस्कैन दस्तावेजों की ऑनलाइन मांग

बिहार सरकार ने भू-अभिलेख पोर्टल पर एक नई व्यवस्था लागू की है। इस नई सुविधा के तहत नागरिक अब उन राजस्व दस्तावेजों को स्कैन करने का अनुरोध ऑनलाइन कर सकेंगे, जो पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए भू-अभिलेख पोर्टल पर एक अतिरिक्त विकल्प दिया गया है। नागरिक अपने दस्तावेज़ की जानकारी देकर स्कैनिंग का अनुरोध कर सकते हैं। इसके बाद सक्षम अधिकारी जैसे अंचल अधिकारी इस अनुरोध पर कार्रवाई करेंगे और दस्तावेज़ को स्कैन करके पोर्टल पर अपलोड कर देंगे। इस तरह, अब लोगों को अंचल कार्यालय जाकर आवेदन देने की जरूरत नहीं पड़ेगी और दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी सीधे ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी।


राजस्व अभिलेखों में क्या-क्या शामिल है?

राजस्व अभिलेखों में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल होते हैं, जिनके लिए पहले अंचल कार्यालय में आवेदन करना पड़ता था। इनमें मुख्य रूप से ये दस्तावेज आते हैं खतियान (पुराना/नया), दाखिल-खारिज (Mutation) के बाद की जमाबंदी, रसीद (ऑनलाइन/ऑफलाइन) ,केवाला (Sale Deed), नक्शा,बंटवारा नामा, सर्वे खसरा पंजी अब इन दस्तावेजों को भी ऑनलाइन देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा, चाहे वे पहले से स्कैन होकर पोर्टल पर अपलोड हों या नहीं।


रजिस्ट्री प्रक्रिया में बदलाव: GIS से होगा फिजिकल वेरिफिकेशन

जमीन की खरीद-बिक्री को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बिहार सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य में किसी भी जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री सिर्फ कागजों के आधार पर नहीं होगी, बल्कि GIS (Geographic Information System) तकनीक के जरिए फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।


इस बदलाव के बाद रजिस्ट्री से पहले निम्नलिखित बातें जांची जाएंगी, जमीन की सटीक लोकेशन, जमीन का असली क्षेत्रफल और जमीन पर बने निर्माण का डिजिटल रिकॉर्ड। इसका उद्देश्य यह है कि दस्तावेजों में जो लिखा है और जमीन की वास्तविक स्थिति में कोई अंतर न रहे। इससे जमीन से जुड़े विवादों और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी।


लोगों के लिए क्या लाभ होगा?

इस नई व्यवस्था से लोगों को कई फायदे होंगे। जिसमें समय की बचत: अंचल कार्यालय जाकर दस्तावेजों के लिए आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी। सुविधा: घर बैठे ऑनलाइन दस्तावेज़ उपलब्ध होंगे। पारदर्शिता: GIS वेरिफिकेशन से जमीन के असली रिकॉर्ड और दस्तावेज़ में मेल होगा। धोखाधड़ी पर अंकुश: नकली दस्तावेजों से रजिस्ट्री संभव नहीं होगी।


बिहार सरकार की यह नई पहल जमीन से जुड़े मामलों को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब अनस्कैन राजस्व दस्तावेजों को भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही GIS तकनीक के जरिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जा रहा है, जिससे जमीन खरीदने वालों को भरोसा मिलेगा और भूमि विवादों में कमी आएगी।

Bihar land records : बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है। इसी कड़ी में अब राज्य में जमीन के राजस्व अभिलेखों को लेकर एक नई सुविधा शुरू की गई है, जिससे लोगों को ऑनलाइन जानकारी और सुविधा मिल सकेगी। अब जो राजस्व दस्तावेज पोर्टल पर स्कैन करके उपलब्ध नहीं होते, उनके लिए भी लोग ऑनलाइन अनुरोध कर सकते हैं और दस्तावेज़ों की डिजिटल कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।


नई सुविधा: अनस्कैन दस्तावेजों की ऑनलाइन मांग

बिहार सरकार ने भू-अभिलेख पोर्टल पर एक नई व्यवस्था लागू की है। इस नई सुविधा के तहत नागरिक अब उन राजस्व दस्तावेजों को स्कैन करने का अनुरोध ऑनलाइन कर सकेंगे, जो पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए भू-अभिलेख पोर्टल पर एक अतिरिक्त विकल्प दिया गया है। नागरिक अपने दस्तावेज़ की जानकारी देकर स्कैनिंग का अनुरोध कर सकते हैं। इसके बाद सक्षम अधिकारी जैसे अंचल अधिकारी इस अनुरोध पर कार्रवाई करेंगे और दस्तावेज़ को स्कैन करके पोर्टल पर अपलोड कर देंगे। इस तरह, अब लोगों को अंचल कार्यालय जाकर आवेदन देने की जरूरत नहीं पड़ेगी और दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी सीधे ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी।


राजस्व अभिलेखों में क्या-क्या शामिल है?

राजस्व अभिलेखों में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल होते हैं, जिनके लिए पहले अंचल कार्यालय में आवेदन करना पड़ता था। इनमें मुख्य रूप से ये दस्तावेज आते हैं खतियान (पुराना/नया), दाखिल-खारिज (Mutation) के बाद की जमाबंदी, रसीद (ऑनलाइन/ऑफलाइन) ,केवाला (Sale Deed), नक्शा,बंटवारा नामा, सर्वे खसरा पंजी अब इन दस्तावेजों को भी ऑनलाइन देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा, चाहे वे पहले से स्कैन होकर पोर्टल पर अपलोड हों या नहीं।


रजिस्ट्री प्रक्रिया में बदलाव: GIS से होगा फिजिकल वेरिफिकेशन

जमीन की खरीद-बिक्री को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बिहार सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य में किसी भी जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री सिर्फ कागजों के आधार पर नहीं होगी, बल्कि GIS (Geographic Information System) तकनीक के जरिए फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।


इस बदलाव के बाद रजिस्ट्री से पहले निम्नलिखित बातें जांची जाएंगी, जमीन की सटीक लोकेशन, जमीन का असली क्षेत्रफल और जमीन पर बने निर्माण का डिजिटल रिकॉर्ड। इसका उद्देश्य यह है कि दस्तावेजों में जो लिखा है और जमीन की वास्तविक स्थिति में कोई अंतर न रहे। इससे जमीन से जुड़े विवादों और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी।


लोगों के लिए क्या लाभ होगा?

इस नई व्यवस्था से लोगों को कई फायदे होंगे। जिसमें समय की बचत: अंचल कार्यालय जाकर दस्तावेजों के लिए आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी। सुविधा: घर बैठे ऑनलाइन दस्तावेज़ उपलब्ध होंगे। पारदर्शिता: GIS वेरिफिकेशन से जमीन के असली रिकॉर्ड और दस्तावेज़ में मेल होगा। धोखाधड़ी पर अंकुश: नकली दस्तावेजों से रजिस्ट्री संभव नहीं होगी।


बिहार सरकार की यह नई पहल जमीन से जुड़े मामलों को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब अनस्कैन राजस्व दस्तावेजों को भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही GIS तकनीक के जरिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जा रहा है, जिससे जमीन खरीदने वालों को भरोसा मिलेगा और भूमि विवादों में कमी आएगी।