Teacher Transfer 2026 : राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अंतर जिला स्थानांतरण के तहत स्कूल आवंटन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। 1 जनवरी से कई जिलों में स्कूल आवंटन की कवायद औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। इससे पहले 31 दिसंबर तक नालंदा जिले को छोड़कर राज्य के लगभग सभी जिलों में स्थानांतरित शिक्षकों को प्रखंड आवंटित कर दिया गया था। अब अगला और अंतिम चरण स्कूल आवंटन का है, जिसे शिक्षा विभाग ने 10 जनवरी तक पूरा करने की समय-सीमा तय की है।
शिक्षा विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार गुरुवार को कटिहार, सुपौल, किशनगंज सहित कई जिलों में प्रखंड आवंटन के बाद स्कूल आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पूरी प्रक्रिया ई-शिक्षकोष पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जा रही है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और शिक्षकों को किसी तरह की असुविधा न हो। विभाग का दावा है कि डिजिटल माध्यम से आवंटन होने के कारण मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और शिकायतों की संख्या भी घटने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि अंतर जिला स्थानांतरण को लेकर शिक्षकों में लंबे समय से असमंजस और इंतजार की स्थिति बनी हुई थी। पहले स्कूल आवंटन की समय-सीमा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई थी, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों से इस अवधि में स्कूल आवंटन पूरा नहीं हो सका। कई जिलों में रिक्तियों की सही स्थिति का मिलान, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों की आवश्यकता का आकलन करने में समय लग गया, जिसके कारण स्कूल आवंटन की प्रक्रिया में देरी हुई। हालांकि अब 1 जनवरी से इसे दोबारा शुरू कर दिया गया है।
ई-शिक्षकोष के आंकड़ों के अनुसार अंतर जिला स्थानांतरण के लिए कुल 41,689 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 27,171 शिक्षकों को जिला आवंटित किया गया। इसके बाद 22,928 शिक्षकों को स्विच (विकल्प) के माध्यम से प्रखंड चुनने का अवसर दिया गया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इनमें से लगभग सभी शिक्षकों को प्रखंड आवंटन के लिए आमंत्रित किया जा चुका है और अधिकतर का प्रखंड निर्धारण भी पूरा हो गया है। अब इन्हीं शिक्षकों को संबंधित प्रखंडों के भीतर स्कूल आवंटित किए जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूल आवंटन में प्राथमिकता रिक्त पदों, विषय की आवश्यकता और स्कूल की छात्र संख्या को ध्यान में रखकर दी जा रही है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहां पहले आवंटन किया जा रहा है, ताकि शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो। साथ ही यह भी प्रयास किया जा रहा है कि स्थानांतरित शिक्षकों को उनके विषय के अनुरूप ही स्कूल मिले, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता बनी रहे।
इस प्रक्रिया के तहत जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि तय समय-सीमा के भीतर स्कूल आवंटन हर हाल में पूरा किया जाए। शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि यदि किसी जिले में अनावश्यक देरी होती है या तकनीकी समस्या सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी की होगी। इसके लिए विभाग स्तर पर निगरानी भी की जा रही है और रोजाना की प्रगति रिपोर्ट मांगी जा रही है।
वहीं, शिक्षकों के बीच इस प्रक्रिया को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई शिक्षक स्कूल आवंटन शुरू होने से राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से वे असमंजस में थे। वहीं कुछ शिक्षक अभी भी अपने पसंदीदा स्कूल या स्थान को लेकर चिंतित हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी शिक्षक के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
कुल मिलाकर, राज्य में अंतर जिला स्थानांतरण के तहत स्कूल आवंटन की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो 10 जनवरी तक अधिकांश शिक्षकों को उनके नए स्कूल मिल जाएंगे। इसके बाद वे अपने नए कार्यस्थल पर योगदान देकर शैक्षणिक सत्र को सुचारू रूप से आगे बढ़ा सकेंगे। शिक्षा विभाग भी उम्मीद जता रहा है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।