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06-Dec-2025 07:51 AM
By First Bihar
Bihar teacher attendance fraud : पटना के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग सतर्क हो गया है। ई-शिक्षा कोष पोर्टल (e-Shiksha Kosh Portal) पर उपस्थिति दर्ज करने के दौरान कई तरह की अनियमितताएँ सामने आने के बाद विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि जो भी शिक्षक फर्जी तरीके से पुरानी तस्वीरें अपलोड कर अपनी मौजूदगी दिखाने की कोशिश करेंगे, उन्हें चिन्हित कर तत्काल निलंबित किया जाए।
शिक्षा विभाग को हाल के दिनों में कई शिकायतें मिली हैं कि शिक्षक उपस्थिति दर्ज करते समय लाइव फोटो लेने के बजाय मोबाइल गैलरी से पुरानी तस्वीर अपलोड कर देते हैं। यही स्थिति लॉग आउट के समय भी देखी जा रही है। पोर्टल की समीक्षा और जांच के बाद पाया गया कि कई शिक्षक प्रतिदिन यही तरीका अपनाकर अपनी उपस्थिति दिखा रहे थे। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही और सेवा नियमों का उल्लंघन माना है।
जिला शिक्षा कार्यालय ने बताया कि कुछ शिक्षकों की शिकायत मिली है कि वे सुबह स्कूल पहुंचकर तस्वीर अपलोड कर उपस्थिति दर्ज करते हैं, लेकिन कुछ ही देर बाद सीधे घर चले जाते हैं। इसके बाद वे निर्धारित समय पर वापस स्कूल आकर लॉग आउट की तस्वीर ले लेते हैं। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि यह व्यवहार पूरी तरह अनुशासनहीनता और फर्जीवाड़े की श्रेणी में आता है। ऐसे शिक्षकों को चिन्हित करने का काम तेजी से किया जा रहा है।
जांच के दौरान कई ऐसे शिक्षक पाए गए जिन्होंने ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज नहीं की और तकनीकी समस्या का बहाना बनाया। जब विभाग ने तकनीकी टीम के साथ मिलकर इसकी जांच की, तो किसी भी प्रकार की खराबी नहीं मिली। इसके बावजूद शिक्षक ऑफलाइन उपस्थिति या रजिस्टर आधारित उपस्थिति का हवाला देकर जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश कर रहे थे। विभाग ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए ऐसे शिक्षकों की सूची बनाने के लिए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है।
जिला शिक्षा कार्यालय की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पटना के कई दूरस्थ प्रखंडों और गांवों के स्कूलों में शिक्षक समय से स्कूल नहीं पहुँचते। सुबह की निर्धारित समयसीमा के बाद वे उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। ऐसे मामलों को भी फर्जी उपस्थिति की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि विभाग के नियम स्पष्ट हैं कि उपस्थिति केवल निर्धारित समय के भीतर ही दर्ज होनी चाहिए।
जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे अपने-अपने प्रखंडों के सभी स्कूलों की उपस्थिति की जांच कर फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों की सूची एक सप्ताह के भीतर जमा करें। विभाग का कहना है कि इसके बाद ऐसे शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन और वेतन रोकने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
शिक्षा विभाग ने कहा है कि सरकार की डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और शिक्षकों की नियमितता सुनिश्चित करना है। लेकिन अगर इसके साथ छेड़छाड़ की गई तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि—
पुरानी तस्वीर अपलोड करने वाले
देर से उपस्थिति दर्ज करने वाले
तकनीकी खराबी का झूठा बहाना बनाने वाले
उपस्थिति दर्ज कर बीच में घर चले जाने वाले
सभी शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने कहा है कि फर्जी उपस्थिति के कारण कई स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई बार अभिभावकों की शिकायत भी मिली है कि शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आते और बच्चे बिना पढ़ाई के लौटते हैं। इस तरह की हरकत शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पटना में ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर हो रहे फर्जीवाड़े ने शिक्षा विभाग को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। आने वाले दिनों में कई शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। विभाग की इस सख्ती से उम्मीद है कि स्कूलों में अनुशासन लौटेगा, शिक्षक समय पर आएंगे और बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा।