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29-Dec-2025 09:29 AM
By First Bihar
DEO warning : बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपी) ने सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और जिला परियोजना अधिकारी (डीपीओ) को कड़ी चेतावनी जारी की है। बीईपी ने स्पष्ट किया है कि यू-डायस 2025-26 के सभी आंकड़े, जिसमें स्कूली बच्चों और शिक्षकों का डेटा शामिल है, 31 दिसंबर तक अपलोड नहीं किए गए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में बीईपी के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने संबंधित जिलों को आधिकारिक पत्र भेजा है।
पत्र में बताया गया है कि पिछले शैक्षणिक सत्र के बच्चों के आंकड़े इस सत्र में कम दर्ज किए गए हैं। बीईपी ने पाया है कि लगभग पांच लाख बच्चों के आंकड़े शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे ये बच्चे सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। शिक्षा मंत्रालय ने यू-डायस 2025-26 के आंकड़ों की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय की है, जिसके पालन में सभी अधिकारियों को सख्ती से काम करना अनिवार्य है।
हाल ही में हुई समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि यू-डायस 2025-26 में नामांकित स्कूलों और पिछले वर्ष 2024-25 में नामांकित छात्रों के आंकड़ों में लगभग 5.93 लाख बच्चों की कमी है। 2024-25 में सरकारी स्कूलों में नामांकित कुल 1 करोड़ 70 लाख छात्रों में से केवल 1 करोड़ 64 लाख छात्रों के ही नामांकन यू-डायस 2025-26 में दर्ज किए गए हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि इन बच्चों के लिए भारत सरकार की तरफ से इस वर्ष राशि आवंटन नहीं किया जाएगा।
बीईपी के राज्य परियोजना निदेशक ने साफ तौर पर कहा है कि योजना की राशि से बच्चों के वंचित होने की पूरी जवाबदेही डीईओ और डीपीओ पर होगी। उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ नामांकन ही नहीं, बल्कि कुछ जिलों में अन्य सुविधाओं जैसे शौचालय, पेयजल, रैम्प, चहारदीवारी और आईसीटी लैब में भी पिछले साल की तुलना में कमी आई है। इसके अलावा, विकलांग बच्चों के आंकड़ों में भी कुछ जिलों से कमी दर्ज की गई है।
बीईपी की यह चेतावनी राज्य के शिक्षा तंत्र में गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जल्द से जल्द सभी स्कूलों और बच्चों के डेटा की पूर्णता सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी छात्र को सरकारी योजनाओं का लाभ से वंचित न रहना पड़े। इस कदम का उद्देश्य न केवल यू-डायस डेटाबेस को अद्यतन रखना है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में समान अवसर और संसाधनों का वितरण सुनिश्चित करना भी है।
इस समीक्षा और चेतावनी के बाद अब राज्य के सभी जिलों में डेटा अपलोडिंग को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। बीईपी ने यह स्पष्ट किया है कि अगर 31 दिसंबर तक डेटा अपलोडिंग पूरी नहीं होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सहित जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस दिशा में कदम उठाने से पहले सभी डीईओ और डीपीओ को अपने जिले के स्कूलों और छात्रों के आंकड़ों की पुष्टि करनी होगी, जिससे किसी भी बच्चे को योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं होना पड़े। बीईपी की यह कार्रवाई बिहार में शैक्षिक गुणवत्ता और योजना लाभ वितरण में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।