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15-Jan-2026 09:40 AM
By First Bihar
Bihar Education : बिहार सरकार की स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना ने राज्य के लाखों युवाओं के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना आसान बना दिया है। इस योजना के तहत पढ़ाई करने वाले छात्रों को सरकारी लोन दिया जाता है, जिससे वे किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान में नामांकन लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। योजना का प्रमुख उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को आर्थिक मदद देना है, जो अपने परिवार की सीमित आय के कारण महंगी शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते।
हालांकि, योजना ने युवाओं के लिए राहत के कई कदम उठाए हैं, लेकिन इसके बावजूद लोन की वापसी में गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं। सरकार ने इस योजना के तहत लोन लेने वाले युवाओं के लिए ब्याज माफ करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2018 के बाद लोन लेने वाले सभी छात्रों को ब्याज माफी का लाभ मिलेगा। जिन छात्रों ने पहले ही लोन की किस्त सहित ब्याज चुका दिया है, उन्हें राशि वापस नहीं मिलेगी, लेकिन जो मूलधन शेष है, उस पर अब कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा। इस कदम से विद्यार्थियों पर वित्तीय दबाव कम हुआ है और उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद लोन चुकाने में मदद मिली है।
राज्य में कुल 3,89,363 युवाओं का ब्याज माफ किया गया है। इसके बावजूद 62,436 युवा अब तक लोन की वापसी शुरू नहीं कर पाए हैं। बिहार राज्य वित्त निगम ने यह जानकारी दी है कि ऐसे सभी डिफॉल्टर युवाओं की सूची जिला स्तर पर निबंधन सह परामर्श केंद्र (डीआरसीसी) द्वारा तैयार कर ली गई है। जनवरी के अंत तक राज्य के सभी 38 जिलों में इन युवाओं के खिलाफ सर्टिफिकेट केस दर्ज करने की तैयारी चल रही है।
राजधानी पटना की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। पटना जिले में 6,938 युवाओं ने अब तक लोन की राशि लौटाना शुरू नहीं किया है। बिहार राज्य वित्त निगम की सहायक महाप्रबंधक कुमारी नीतू ने बताया कि पटना जिले में अब तक करीब 5,000 युवाओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत लोन दिया गया है। शेष आवेदनों की जांच अभी चल रही है और उन्हें भी तेजी से निष्पादित किया जा रहा है।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड लोन केवल बिहार के स्थायी निवासियों को दिया जाता है। इसके लिए आवश्यक है कि छात्र ने बिहार से इंटर पास किया हो। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर, लेकिन पढ़ाई में मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर देना है।
लोन वापसी की शर्तें भी स्पष्ट हैं। पढ़ाई पूरी करने के एक साल बाद से लोन चुकाना अनिवार्य है। अगर किसी छात्र ने 4 लाख रुपये तक का लोन लिया है, तो उसे 10 साल में मूलधन चुकाना होगा। वहीं, इससे कम राशि लेने वालों के लिए लोन चुकाने की अवधि 7 साल तय की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नियमित रूप से लोन की किस्त चुकाएं और भविष्य में वित्तीय जिम्मेदारी निभाना सीखें।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन किया जाता है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान छात्र को अपने दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। इसके बाद बैंक और शिक्षा विभाग द्वारा दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किया जाता है। लोन स्वीकृत होने पर कार्ड जारी किया जाता है। आवश्यक दस्तावेजों में छात्र और माता-पिता का आधार कार्ड, पैन कार्ड, 10वीं और 12वीं का प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और कॉलेज का फीस स्ट्रक्चर शामिल है।
योजना से जुड़े अधिकारी लगातार विद्यार्थियों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे लोन समय पर चुकाएं। इसके लिए विभिन्न जिलों में परामर्श केंद्र बनाए गए हैं, जो छात्रों और उनके परिवार को लोन शर्तों और भुगतान प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हैं।
बिहार सरकार की यह पहल विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है, लेकिन योजना की सफलता इस पर भी निर्भर करती है कि छात्र लोन की वापसी समय पर करें। यदि डिफॉल्टर युवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, तो इसका संदेश अन्य छात्रों के लिए चेतावनी स्वरूप होगा और योजना का उद्देश्य अधिक प्रभावी रूप से पूरा होगा।
इस प्रकार, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना न केवल आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए राहत का माध्यम है, बल्कि यह युवाओं में वित्तीय जिम्मेदारी और अनुशासन विकसित करने का भी जरिया है। सरकार ने ब्याज माफी जैसी सुविधा देकर छात्रों का बोझ कम किया है, लेकिन अब मुख्य चुनौती यह है कि सभी लाभार्थी समय पर लोन वापस करें और योजना का उद्देश्य साकार हो।