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Bihar State Women Commission : बिहार की महिलाओं पर विवादित बयान देकर बुरे फंसे महिला मंत्री के हसबैंड , महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान ; सरकार से कार्रवाई की मांग

बिहार की महिलाओं को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर बिहार राज्य महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की है।

Bihar State Women Commission : बिहार की महिलाओं पर विवादित बयान देकर बुरे फंसे महिला मंत्री के हसबैंड , महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान ; सरकार से कार्रवाई की मांग

02-Jan-2026 08:35 PM

By First Bihar

Bihar State Women Commission : बिहार की महिलाओं को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान को लेकर बिहार राज्य महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरीश लाल साह द्वारा दिए गए बयान की तीखी निंदा की है। आयोग ने इसे बिहार की महिलाओं के स्वाभिमान पर सीधा आघात बताया है और इस संबंध में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।


बिहार राज्य महिला आयोग, पटना की अध्यक्ष अप्सरा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि गिरीश लाल साह द्वारा बिहार की महिलाओं के संदर्भ में दिया गया बयान अत्यंत शर्मनाक, निंदनीय और अपमानजनक है। आयोग के अनुसार, उनके बयान में यह कहा गया कि “बिहार में लड़कियां 20-25 हजार रुपये में मिल जाती हैं”, जो न केवल बिहार की महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति नकारात्मक और घृणित सोच को भी दर्शाता है।


आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस तरह के बयान से बिहार की महिलाएं स्वयं को अपमानित और आहत महसूस कर रही हैं। महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए गठित बिहार राज्य महिला आयोग ऐसे किसी भी बयान को स्वीकार नहीं कर सकता, जो महिलाओं की छवि को धूमिल करे और उन्हें वस्तु के रूप में प्रस्तुत करे।


पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस परिवार में स्वयं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री जैसी जिम्मेदार पद पर आसीन महिला निवास करती हों, उसी परिवार के सदस्य द्वारा इस तरह का आपत्तिजनक बयान दिया जाना और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। आयोग का मानना है कि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह को बढ़ावा देते हैं।


बिहार राज्य महिला आयोग ने उत्तराखंड सरकार से अपेक्षा जताई है कि वह इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने स्तर से त्वरित और सख्त कार्रवाई करे। आयोग ने यह भी अनुरोध किया है कि की गई कार्रवाई की जानकारी अविलंब आयोग को उपलब्ध कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिलाओं के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


महिला आयोग ने अपने पत्र में यह दोहराया है कि बिहार की महिलाएं आत्मसम्मान, मेहनत और संघर्ष का प्रतीक हैं। राज्य की महिलाओं ने शिक्षा, राजनीति, प्रशासन, खेल और सामाजिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक या निजी व्यक्ति द्वारा महिलाओं के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी करना न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि कानून और सामाजिक मूल्यों के भी खिलाफ है।


इस प्रकरण को लेकर बिहार में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बयान की निंदा करते हुए दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की सोच महिलाओं को कमजोर करने और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।


बिहार राज्य महिला आयोग का यह कदम इस बात का संकेत है कि महिलाओं से जुड़े मामलों में आयोग पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। आयोग ने साफ किया है कि भविष्य में भी महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी या व्यवहार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल सभी की निगाहें उत्तराखंड सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में वहां की सरकार क्या कदम उठाती है और क्या बिहार राज्य महिला आयोग की मांगों पर अमल किया जाता है या नहीं। हालांकि, इतना तय है कि इस मामले ने महिलाओं के सम्मान और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी से बोलने की आवश्यकता को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।