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School Uniform : सरकारी स्कूलों में ड्रेस वितरण को लेकर लागू होंगे नए नियम, जीविका दीदियों को मिला बड़ा काम; पढ़िए क्या है नया नियम

School Uniform : बिहार सरकार स्कूलों में यूनिफॉर्म वितरण में बदलाव पर विचार कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि अब जीविका दीदियों के जरिए प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को सीधे यूनिफॉर्म दिया जा सकता है। इससे बच्चों को समय पर और सम्म

School Uniform : सरकारी स्कूलों में ड्रेस वितरण को लेकर लागू होंगे नए नियम, जीविका दीदियों को मिला बड़ा काम; पढ़िए क्या है नया नियम

19-Jan-2026 10:22 AM

By First Bihar

School Uniform : बिहार की राजनीति में शिक्षा और रोजगार को एक साथ जोड़ने की नई पहल पर सियासी चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने रविवार, 18 जनवरी को पटना स्थित दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में संकेत दिए कि राज्य सरकार प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए यूनिफॉर्म वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर सकती है। उनके अनुसार, शिक्षा विभाग के माध्यम से बच्चों को नकद राशि देने की मौजूदा व्यवस्था में कई बार यह पैसा घर की अन्य जरूरतों पर खर्च हो जाता है और बच्चे बिना ड्रेस के ही स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में नई योजना के तहत जीविका दीदियों के माध्यम से सीधे यूनिफॉर्म देने की बात की जा रही है ताकि हर बच्चा पूरे सम्मान के साथ स्कूल आ सके।


मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि आंगनबाड़ी में बच्चों को जीविका समूहों द्वारा सिलाई के जरिए यूनिफॉर्म देने का मॉडल पहले ही सफल हो चुका है। इसी तर्ज पर अब प्राथमिक स्कूलों तक यह व्यवस्था विस्तार की तैयारी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर शिक्षा विभाग के साथ उच्चस्तरीय बातचीत जल्द शुरू होगी। अगर यह योजना लागू हुई, तो न केवल बच्चों को समय पर और सही यूनिफॉर्म मिलेगा, बल्कि इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और पैसे के गलत उपयोग की संभावना कम होगी।


आंकड़ों की भाषा में देखें तो बिहार में यह प्रयोग पहले ही आंगनबाड़ी स्तर पर कामयाब रहा है। वर्तमान में राज्य के करीब 50 लाख आंगनबाड़ी बच्चों को जीविका समूहों द्वारा सिलाई करके यूनिफॉर्म दिया जा रहा है, जिसका वितरण मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी मॉडल को अब स्कूल शिक्षा तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।


जीविका योजना आज बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। सरकार ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 1.54 करोड़ से अधिक जीविका दीदियों को 10,000 रुपये की सहायता दी थी, जिससे हजारों महिलाओं ने सिलाई मशीन खरीदीं। आज राज्य में 1,050 सिलाई केंद्रों के जरिए करीब एक लाख महिलाएं ड्रेस निर्माण से जुड़ी हैं और आने वाले वर्षों में यह संख्या 5 लाख के पार जाने का अनुमान है। 2006 में विश्व बैंक के सहयोग से शुरू हुई यह मुहिम अब 1.4 करोड़ महिलाओं और 11 लाख स्वयं सहायता समूहों तक फैल चुकी है।


कार्यक्रम में मौजूद समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर दूध, अंडा और यूनिफॉर्म ने बच्चों में बराबरी की भावना पैदा की है। बेहतर पोषण और नियमित भोजन से कुपोषण पर भी लगाम लगी है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सिलाई कार्य की निगरानी हेतु नए डिजिटल टूल और ट्रेनिंग मैनुअल भी लॉन्च किए गए हैं।


विश्लेषकों का कहना है कि बिहार सरकार की यह पहल शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को एक ही धागे में पिरोने की सियासी कोशिश है। अगर यह मॉडल स्कूल शिक्षा तक सफल रहा, तो न केवल बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के रोजगार को भी नई गति मिलेगी, जिससे राज्य की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर और मजबूत हो सकती है।