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ED raid : रेलवे नौकरी फर्जीवाड़े में कई ठिकानों पर छापेमारी, ईडी आई तो भाग गया कामेश्वर; पढ़िए क्या है पूरी खबर

बिहार में रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर और मोतिहारी सहित देश के छह राज्यों में एक साथ छापेमारी की।

ED raid : रेलवे नौकरी फर्जीवाड़े में कई ठिकानों पर छापेमारी, ईडी आई तो भाग गया कामेश्वर; पढ़िए क्या है पूरी खबर

09-Jan-2026 10:05 AM

By First Bihar

ED raid : रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के मामले में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिहार समेत देश के छह राज्यों में एक साथ छापेमारी की। बिहार में मुजफ्फरपुर और मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) में रेड की गई। मुजफ्फरपुर के रामबाग चौड़ी स्थित शास्त्री नगर मोहल्ले में ईडी की टीम पहुंची और नंदकिशोर गुप्ता के मकान में किराये पर रह रहे कामेश्वर पांडेय के घर तलाशी ली।


ईडी की टीम के पहुंचते ही कामेश्वर छत के रास्ते से भाग निकला। करीब छह घंटे तक तलाशी लेने के बाद टीम ने परिजनों से पूछताछ की। ईडी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़े से जुड़ी है। मुख्य आरोपी राजेंद्र तिवारी के रिश्तेदार कामेश्वर के घर तलाशी ली गई। हालांकि, बरामदगी के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। मकान मालिक नंदकिशोर गुप्ता वाराणसी से लौटकर बता रहे हैं कि कामेश्वर 19 दिसंबर से उनके मकान में किराये पर रह रहा था और खुद को छपरा निवासी बताता रहा।


कामेश्वर पहले चूनाभट्ठी मोहल्ले में रहता था, लेकिन 30 साल से उसका परिवार मुजफ्फरपुर में ही है। उसका आधार कार्ड मुजफ्फरपुर के चंदवारा मोहल्ले के पते पर बना हुआ है। यह आधार कार्ड उसने मकान मालिक को पहचान के रूप में दिया था। परिजनों ने इस मामले में अधिक जानकारी देने से परहेज किया। कार्रवाई के बाद मकान मालिक ने कामेश्वर को मकान खाली करने के लिए कहा। कामेश्वर के परिवार में पत्नी, बेटा, बहू और तीन पोते-पोती शामिल हैं, जो स्थानीय व्यवसाय से जुड़े हैं।


पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में भी ईडी ने कोटवा और डुमरियाघाट में छापेमारी की। कोटवा के अमवा गांव में सक्षम श्रीवास्तव के घर तलाशी ली गई और उनसे संपत्ति व बैंक खातों की जानकारी जुटाई गई। डुमरियाघाट के सेमुआपुर में दीपक तिवारी के घर पर भी लगभग 15 घंटे तक तलाशी चली। हालांकि, दीपक तिवारी उस समय घर पर नहीं थे और उनकी पत्नी से जानकारी ली गई। इस दौरान किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।


इस मामले का खुलासा फर्जी ट्रेनिंग सेंटर से हुआ था। रेलवे में सुरक्षा बल और अन्य विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर चलाए जा रहे फर्जी ट्रेनिंग सेंटर की सूचना पर 6 दिसंबर 2024 को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भटहां गांव में छापेमारी की गई थी। पुलिस ने इस दौरान सन्नी कुमार को गिरफ्तार किया और कई अहम दस्तावेज, पिस्टल व अन्य सामान बरामद किए।


सोनपुर रेल थाना के थानाध्यक्ष के बयान पर मुफस्सिल थाना में केस दर्ज किया गया। इस मामले में दीपक तिवारी ने अपने बयान में बताया कि सक्षम श्रीवास्तव और घोड़ासहन के दीघा निवासी पप्पू कुमार के साथ मिलकर वह रेलवे पुलिस और अन्य विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी तरीके से पैसा लेता था। भटहां गांव में चल रहे फर्जी ट्रेनिंग सेंटर को पप्पू कुमार का बताया गया है।


ईडी की ये कार्रवाई देशभर में नौकरी के नाम पर हो रहे बड़े पैमाने के फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त संदेश है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और आरोपियों की संपत्ति व बैंक लेनदेन की जांच की जाएगी। यह कार्रवाई बिहार में नौकरी दिलाने के नाम पर हो रहे धोखाधड़ी के मामलों पर शिकंजा कसने की दिशा में अहम कदम है।