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14-Dec-2025 03:35 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Bhumi: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सीओ पर नकेल कसने की पूरी तैयारी कर दी है। सरकार के इस कदम से न सिर्फ अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम लगेगा बल्कि लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने परिमार्जन के लिए समय सीमा तय कर दी है। बिहार में अब 15 दिनों में परिमार्जन होगा।
दरअसल, बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि समीक्षा के क्रम में पाया गया कि परिमार्जन प्लस पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों के निष्पादन में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती जा रही है। इसलिए रैयतों को समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराने के लिए सभी कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है।
इसके बाद किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी मामलों का निस्तारण अनिवार्य होगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि परिमार्जन प्लस के मामलों में अब शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम रैयतों को त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद राजस्व सेवा देना है और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी|
राज्य के आम नागरिकों और भू-धारियों को भूमि संबंधी मामलों में त्वरित और पारदर्शी सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने परिमार्जन प्लस पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों के निष्पादन के लिए स्पष्ट और सख्त समय-सीमा निर्धारित कर दी है। विभाग ने साफ किया है कि अब जमाबंदी से जुड़ी त्रुटियों के सुधार में अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभाग द्वारा भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अब तक लगभग 4.50 करोड़ जमाबंदियों को ऑनलाइन किया जा चुका है। हालांकि, डिजिटलीकरण के क्रम में कुछ जमाबंदियों में रैयत के नाम, पिता का नाम, खाता, खेसरा, रकबा, लगान आदि से संबंधित त्रुटियां सामने आई हैं। इन्हीं विसंगतियों के त्वरित और सुव्यवस्थित समाधान के लिए परिमार्जन प्लस पोर्टल विकसित किया गया है।
पोर्टल के माध्यम से डिजिटाइज्ड जमाबंदी में नाम, पिता का नाम, जाति, पता, खाता, खेसरा, रकबा और लगान से जुड़ी त्रुटियों के सुधार के साथ-साथ छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन करने की सुविधा है। समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि समय-सीमा निर्धारित नहीं होने के कारण अंचल स्तर पर आवेदनों के निष्पादन में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं और आम रैयतों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने परिमार्जन प्लस के तहत प्राप्त आवेदनों के निष्पादन के लिए अधिकतम समय-सीमा तय कर दी है। इसके अनुसार लिपिकीय/टंकण भूल या लोप से जुड़ी त्रुटियों का सुधार 15 कार्य दिवस में किया जाएगा। छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन करने का कार्य 75 कार्य दिवस में निर्धारित किया गया है। भू-मापी की आवश्यकता वाले मामलों का निष्पादन भी 75 कार्य दिवस में अनिवार्य रूप से करने की सीमा तय की गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लौटाए गए मामलों में आवेदक के लॉगिन में लंबित अवधि को कार्य दिवस की गणना से बाहर रखा जाएगा। विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परिमार्जन प्लस पोर्टल पर प्राप्त सभी आवेदनों का निष्पादन निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करें। साथ ही, मामलों के निस्तारण में लापरवाही या शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने और इसकी सूचना विभाग को देने के निर्देश भी दिए गए हैं।