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17-Dec-2025 11:38 AM
By First Bihar
Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार में वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और अलग होने जा रहे हैं। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों का चुनाव किया जाएगा, लेकिन इस बार सबसे बड़ा बदलाव आरक्षण व्यवस्था को लेकर होगा। पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आरक्षित सीटों का रोस्टर बदला जाएगा, जिससे राज्य की सभी पंचायत स्तर की आरक्षित सीटों में बदलाव तय है।
बिहार में वर्तमान में कुल 8053 ग्राम पंचायतें, 533 पंचायत समितियां और 38 जिला परिषदें हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर वार्डों की संख्या लगभग 1.15 लाख है। पंचायती राज विभाग के अनुसार राज्य में कुल पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 2.48 लाख है। इनमें पंच, सरपंच, वार्ड पार्षद, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के चुनाव के कारण पंचायत चुनाव को लोकतंत्र का सबसे बड़ा अभ्यास माना जाता है।
पंचायती राज अधिनियम के तहत बिहार में पंचायत चुनावों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान है। इस नियम के तहत यह तय है कि जिन सीटों पर वर्तमान में महिला प्रतिनिधि हैं, वहां इस बार पुरुष उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे और जिन सीटों पर अभी पुरुष प्रतिनिधि हैं, वे सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस बदलाव से न केवल चुनावी समीकरण बदलेंगे, बल्कि कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक रणनीति भी प्रभावित होगी।
पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राज्य के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण का रोस्टर एक तय प्रक्रिया के तहत बदला जाता है। उन्होंने बताया कि पंचायती राज अधिनियम के अनुसार हर 10 वर्षों में आरक्षित सीटों में बदलाव किया जाता है। इसी प्रावधान के तहत इस बार भी रोस्टर बदला जाएगा। मंत्री ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग इस दिशा में लगातार काम कर रहा है और नए रोस्टर को तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इस बार के पंचायत चुनावों में तकनीक का दायरा भी पहले से कहीं ज्यादा व्यापक होगा। मंत्री दीपक प्रकाश के अनुसार मल्टी पोस्ट ईवीएम पहले से मौजूद एक तकनीक है, लेकिन आने वाले चुनाव में और भी नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। खास तौर पर मतदान के समय फेसियल रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य बोगस वोटिंग और फर्जी मतदान को रोकना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व विश्वसनीय बनाया जा सके।
राज्य सरकार का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से न केवल मतदान प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि मतदाताओं का भरोसा भी मजबूत होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव के दौरान अक्सर पहचान को लेकर विवाद सामने आते हैं। फेसियल रिकॉग्निशन जैसी तकनीक से ऐसे विवादों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
पंचायत प्रतिनिधियों की डिजिटल साक्षरता को लेकर भी सरकार गंभीर है। मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि पंचायती राज विभाग समय-समय पर जनप्रतिनिधियों के लिए वर्कशॉप आयोजित करता है। इन वर्कशॉप्स में उनकी क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि वे बदलती तकनीक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ तालमेल बिठा सकें।
उन्होंने कहा कि यह कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निरंतर चलने वाला कार्यक्रम है। विभाग की ओर से जिला पंचायती राज संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) और राज्य पंचायती राज संसाधन केंद्र (एसपीआरसी) के माध्यम से पूरे साल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन प्रशिक्षणों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन योजनाओं की निगरानी, डिजिटल भुगतान प्रणाली और डेटा प्रबंधन जैसे विषयों पर जानकारी दी जाती है।
चुनाव प्रक्रिया में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से आम लोगों को भी सहूलियत मिलने की उम्मीद है। मतदान से लेकर परिणाम घोषित होने तक की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 का पंचायत चुनाव न केवल आरक्षण के कारण, बल्कि तकनीकी बदलावों की वजह से भी बिहार के पंचायत चुनावों के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
कुल मिलाकर, बिहार पंचायत चुनाव 2026 कई बड़े बदलावों के साथ होने जा रहा है। आरक्षण रोस्टर में बदलाव, 50 प्रतिशत महिला भागीदारी, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और जनप्रतिनिधियों की डिजिटल क्षमता निर्माण—ये सभी पहलू इस चुनाव को खास बनाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये बदलाव जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को कितना मजबूत कर पाते हैं।