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09-Jan-2026 06:35 PM
By First Bihar
DESK: बिहार में धान खरीद में किस तरह का खेल हो रहा है, इसका हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. इसमें फर्जीवाड़े के लिए किस तरह का खेल हो रहा है, इसे देखिये. इंद्रदेव नाम के एक किसान ने 10 डिसमल जमीन में 165 क्विंटल धान उपजा लिया. चंपा नाम की किसान ने 20 डिसमल में 75 क्विंटल धान उपजाया. राजकुमार यादव नाम के एक किसान को 75 डिसमल जमीन में 200 क्विंटल धान हुआ.
धान की खेती का ये रिकार्ड दुनिया भर के कृषि वैज्ञानिकों को पागल बना सकता है. लेकिन धान खरीद में लगे पैक्स में ऐसा ही रिकार्ड दर्ज है. धान खरीद में लगे पैक्स या दूसरी एजेंसी को किसानों से धान खरीदना है. लेकिन किसानों को सही मूल्य देने के बजाय फर्जीवाड़ा कर सरकार की आंख में धूल झोंकने की लूट मची हुई है.
जमुई में सामने आये मामले
बिहार के जमुई जिले में अब तक हुई धान की खरीद का जो रिकार्ड सामने आया है, उसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी साफ दिख रही है. पैक्स के कागजों में धान खरीद का जो लेखा-जोखा दर्ज है, उसमें किसानों से ली गई धान की मात्रा और उनके जोत में भारी अंतर है. ये बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि कर रहा है.
पैक्सों के कागज में मामूली रकबा वाले किसान के नाम पर 100 से 200 क्विंटल धान खरीदने का लेखाजोखा दर्ज है. तभी जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड के पिडरौन पैक्स ने 10 डिसमल जमीन वाले इंद्रदेव नामक किसान से 135 क्विंटल धान खरीद कर रिकॉर्ड बना दिया.
सिर्फ इंद्रदेव ने ही नहीं बल्कि कई और किसानों ने चमत्कार किया है. चंपा देवी नाम की किसान ने 20 डिसमिल जमीन में 75 क्विंटल धान उत्पादन किया है. वहीं, राजकुमार यादव ने 75 डिसमिल जमीन में 200 क्विंटल धान उत्पादन कर दिखाया है.
ऐसा खेल जमुई जिले की सिर्फ एक पैक्स या प्रखंड में नहीं हुआ है बल्कि जिले के अधिकांश पैक्स में हो रहा है. जमुई के लक्ष्मीपुर प्रखंड के पिडरौन, हरला और नजारी, गिद्धौर के पतसंडा और मौरा, चकाई के बामदह, माधोपुर, चकाई और रामचंद्रडीह, खैरा के कागेश्वर, मांगोबंदर, जीत-झिंगोई, चुआं, सदर प्रखंड अंतर्गत मंझवे, झाझा के महापुर, रजलाकला और छापा, सोनो के पैरा मटिहाना जैसे दो दर्जन पैक्स से ऐसा ही मामला निकलकर सामने आया है.
पिडरौन पैक्स में इंद्रदेव यादव के पास कुल जमा 10 डिसमिल जमीन है और उन्होंने 135 क्विंटल धान पैक्स को दिया है. बालेश्वर यादव की पत्नी चंपा देवी को 20 डिसमिल जमीन है और उनसे 75 क्विंटल धान की खरीद हुई है. 75 डिसमिल जमीन के मालिक राजकुमार यादव ने भी 200 क्विंटल धान पैक्स को बेचा है. 98 डिसमिल जमीन में हेमा देवी ने 98 क्विंटल धान बेचा है.
विद्या देवी नाम किसान को एक एकड़ जमीन में 95 क्विंटल, राजू यादव को एक एकड़ में 100 क्विंटल, परमानंद साह को एक एकड़ में 110 क्विंटल, राधेश्याम को दो एकड़ में 200 क्विंटल, अनूप लाल साह को दो एकड़ में 200 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ, जिसकी खरीद पिडरौन पैक्स ने की है.
फर्जीवाड़े का खेल समझिये
दरअसल, सरकार ने पैक्सों को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदने का जिम्मा दे रखा है. पैक्सों का काम है कि वे किसानों ने धान खरीदें और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य दें. लेकिन पैक्स बड़े फर्जीवाड़े में लगे हैं. किसानों को बाजिव दाम देने के बजाय खुले बाजार में औने-पौने दाम पर धान खरीद लिया जा रहा है. इसके बाद उस धान को छोटी जोत वाले किसी किसान के नाम पर कागज पर दर्ज कर लिया जा रहा है.
एक क्विंटल धान पर 600 रूपये की कमाई
इस साल बाजार में धान 1700-1800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है. जबकि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य धान के लिए 2369 रुपये निर्धारित है. पैक्स संचालक और व्यापार मंडल खुले बाजार में धान और चावल की खरीद कर ले रहे हैं. फिर अपने नजदीकी भरोसेमंद किसानों के नाम पर फर्जी रसीद के सहारे धान खरीद दिखा दिया जा रहा है. इस खेल में पैक्सों को एक क्विंटल धान पर 500 से 600 रूपये की कमाई हो जा रही है.