बिहार की शिक्षा व्यवस्था में जल्द होने जा रहा बड़ा बदलाव, 80 हजार सरकारी स्कूलों में इस महीने से लागू होगी शैक्षणिक सुधार योजना बिहार की शिक्षा व्यवस्था में जल्द होने जा रहा बड़ा बदलाव, 80 हजार सरकारी स्कूलों में इस महीने से लागू होगी शैक्षणिक सुधार योजना देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के लिए आभा नंबर जरूरी; बिहार में भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के लिए आभा नंबर जरूरी; बिहार में भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था Bihar news : बड़ी लापरवाही! शौचालय का वेंटिलेटर तोड़कर दो लड़कियां फरार, प्रशासन में हड़कंप LPG संकट का असर: पति ने नहीं भरवाया सिलेंडर में गैस, घर छोड़कर चली गई पत्नी LPG संकट का असर: पति ने नहीं भरवाया सिलेंडर में गैस, घर छोड़कर चली गई पत्नी BIHAR NEWS : हाईटेक निगरानी से खनन माफियाओं पर शिकंजा, अब हर ट्रक पर डिजिटल नजर; चलते -चलते हो जाएगा नाप -तौल नहाय-खाय के साथ आज से चैती छठ की शुरुआत, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग होंगे पटना के 49 घाट; सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहाय-खाय के साथ आज से चैती छठ की शुरुआत, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग होंगे पटना के 49 घाट; सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
08-Oct-2025 12:48 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के सारण जिले में लगने वाला सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है और इस बार यह लोकप्रिय मेला कुछ दिनों की देरी से शुरू होगा। पहले 3 नवंबर को इसके उद्घाटन का प्लान था लेकिन विधानसभा चुनाव की वजह से तारीख बढ़ा दी गई है। अब यह मेला 9 नवंबर से शुरू होकर 10 दिसंबर तक चलेगा। जिलाधिकारी अमन समीर ने कहा है कि चुनाव और मेला दोनों ही बड़े आयोजन हैं ऐसे में प्रशासन पहले वोटिंग पर ही फोकस करेगा। वहीं, कार्तिक पूर्णिमा का स्नान 5 नवंबर को ही होगा तो दुकानदार उस अनुसार पहले से ही सजावट शुरू कर देंगे।
सोनपुर मेले का इतिहास बहुत ही पुराना और धार्मिक रहा है। इसके बारे में कथा है कि कभी यहां गंगा स्नान कर रहे एक हाथी पर घड़ियाल ने हमला कर दिया था। खुद को हारता देख हाथी ने मदद के लिए भगवान विष्णु को पुकारा, जिसके बाद वे प्रकट हुए और हाथी को बचाते हुए उन्होंने घड़ियाल का वध कर दिया। तब से हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर हाथी, घोड़े, ऊंट, गाय, भैंस, तोते, कबूतर जैसे पशु-पक्षियों का बाजार यहां सजता है। पहले यहां हाथियों की खरीद-बिक्री भी होती थी लेकिन अब वन्यजीव कानून के तहत वो बंद है। उसके बावजूद लाखों लोग यहां दूर-दूर से आते हैं। गंगा-गंडक के संगम पर ये मेला हरिहर क्षेत्र की शान माना जाता है।
इस बार चुनाव 6 नवंबर को हैं, ऐसे में मेला के आयोजन को टालना जरुरी भी था। इससे प्रशासन को मतदान पर पूरी तरह से ध्यान देने का मौका मिलेगा। उधर दुकानदार खुश हैं क्योंकि पहले से ही स्नान के बहाने वे दुकानें लगा लेंगे और 5 नवंबर से ही उनकी कमाई शुरू हो जाएगी। इस मेले में नाव दौड़, कुश्ती, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं। पर्यटन विभाग ने स्विस कॉटेज और कैंप लगाने का भी प्लान किया है ताकि पर्यटक आराम से रह सकें। पटना से सिर्फ 25 किमी दूर होने से यहां पहुंचना आसान है।