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14-Dec-2025 02:22 PM
By Viveka Nand
Bihar News: बिहार में अक्सर अफसरशाही का मुद्दा उठता रहता है. सांसद और विधायक अफसरों की बदसलूकी और प्रोटोकॉल के तहत सम्मान नहीं दिए जाने की शिकायत करते रहे हैं. नीतीश राज में सत्ता पक्ष के माननीय भी नौकरशाहों द्वारा सम्मान नहीं दिए जाने का मुद्दा कई दफे उठा चुके हैं. लोकतंत्र में सांसदों-विधायकों का सम्मान सर्वोपरी होता है. सांसदों-विधायकों का सम्मान बचाने को लेकर नीतीश सरकार ने कई दफे पत्र लिखा. मामनीय का सम्मान कैसे बचे, इसे लेकर गाईडलाइन जारी किए. सरकार ने यह भी कहा कि अगर विधायक या सांसद आपके दफ्तर आते हैं तो खड़े होकर अभिवादन करें. सरकार माननीयों की प्रतिष्ठा बरकरार रखने को बार-बार पत्र जारी कर रही है, दूसरी तरफ विधायक ही अपनी प्रतिष्ठा गिराने पर तुले हैं. अधिकारियों के सामने नतमस्तक हो रहे. कमर से नीचे झुककर दंड़वत कर कर रहे, ऐसे में अफसर और सरकार का क्या कसूर ?
लोकतंत्र की सच्ची तस्वीर दिखी, ऐसे-ऐसे हैं हमारे विधायक....
बिहार में सत्ता पक्ष के एक विधायक की अधिकारी के समझ नतमस्तक होते तस्वीर वायरल हो रही है. यह तस्वीर पुरानी नहीं, बल्कि 13 दिसंबर 2025 की है. सूबे के मुख्य सचिव विधायकजी के क्षेत्र में गए थे. इस दौरान विधायक जी सार्वजनिक तौर पर कमर से नीचे झुककर प्रमाण कर रहे हैं. तस्वीर देखकर ऐसा लग रहा मानो...विधायक जी मुख्य सचिव का अभिवादन करने के चक्कर में सारा प्रोटोकॉल भूल गए. दरअसल, सूबे के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत शनिवार को अगुवानी घाट पुल निर्माण की समीक्षा करने खगड़िया के परबत्ता गए थे। चीफ सेक्रेट्री पूरे लाव लश्कर के साथ हेलिकॉप्टर पर सवार होकर पहुंचे थे. मुख्य सचिव की अगुवानी के लिए अफसरों की फौज हैलिपैड पर मौजूद थी. परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से लोजपा(रा) के विधायक बाबूलाल शौर्य भी वहां पहुंचे थे. उन्होंने मुख्य सचिव को शॉल देकर सम्मानित किया. इसके बाद जो किया..वो चर्चा का विषय बन गया है. विधायक बालू लाल शौर्य सार्वजनिक तौर पर मुख्य सचिव के सामने नतमस्तक दिखे. कमर से नीचे झुककर और हाथ जोड़कर प्रमाण करते दिखे. इस दौरान पथ निर्माण विभाग व अन्य विभाग के अधिकारी मुस्कुरा रहे थे. अब वह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
सांसद-विधायकों के सम्मान में अफसरों को खड़ा होकर अभिवादन करना चाहिए....
बता दें, विधायकों-सांसदों का सम्मान बचाने को लेकर नीतीश सरकार ने कई दफे गाईड लाइन जारी कर चुकी है. सामान्य प्रशासन विभाग, संसदीय कार्य विभाग की तरफ से 2021 और 2022 में पत्र लिखकर प्रोटोकॉल के तहत सम्मान प्रदर्शित करने को निदेशित किया गया है. सरकार ने साफ कहा है कि सांसदों-विधायक के मिलने आने पर पदाधिकारियों को अपने स्थान से उठकर उनका स्वागत करना चाहिए और उनके जाते समय भी उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए भेजना चाहिए.
स्थान आरक्षित होने चाहिए
अगर किसी राजकीय कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया गया है तो उनके बैठने की जगह राज्यपाल, मुख्य न्यायाधीश आदि के तुरंत बाद और सचिवों से आगे रखा जाना चाहिए. जहां समारोहों में संसद सदस्य और राज्य विधानमंडल के सदस्य दोनों आमंत्रित हो, वहां राज्य विधानमंडल के सदस्यों का स्थान संसद सदस्यों के तुरंत बाद रखा जाना चाहिए. उक्त सदस्यों के लिए स्थान आरक्षित होने चाहिए. देर से आने अथवा उनकी अनुपस्थिति की स्थिति में भी उनके लिए आरक्षित सीटों को समारोह के अंत तक आरक्षित रखा जाना चाहिए, भले ही वे खाली क्यों न रह जाए.
सभी बतों को ध्यान से सुनना चाहिए
बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव चंचल कुमार द्वारा 9 नवंबर 2021 को जारी पत्र में बताया गया है कि सरकारी कर्मचारियों या पदाधिकारियों को संसद सदस्यों और राज्य विधानमंडल के सदस्यों के साथ विनम्रता और शिष्टाचार का बर्ताव करना चाहिए. उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुनना और उन पर ध्यान पूर्वक विचार करना चाहिए. सभी पदाधिकारियों को संसद सदस्यों और राज्य विधानमंडल के सदस्यों को उनके संवैधानिक कामों के संपादन में मदद करनी चाहिए. लेकिन किसी सदस्य के अनुरोध या सुझाव को मानने में अगर असमर्थता है तो असमर्थता के कारणों को उन्हें विनम्रतापूर्वक स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए.