Bihar Diwas:पटना के गांधी मैदान में बिहार दिवस कार्यक्रम का आयोजन कल, डीएम ने तैयारियों का लिया जायजा बिहार में आंधी-बारिश का कहर, 6 की मौत, 10 लोग घायल, ओलावृष्टि से फसलें भी बर्बाद बिहार में लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में डेडिकेटेड वार्ड की व्यवस्था करने के निर्देश बिहार में लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में डेडिकेटेड वार्ड की व्यवस्था करने के निर्देश समस्तीपुर में हेरोइन तस्कर गिरोह का पर्दाफाश, महिला समेत दो गिरफ्तार बिहार में गाड़ियों की फिटनेस टेस्ट पर सख्ती, ATS केंद्रों पर कैमरे की निगरानी में होगी जांच बिहार में गाड़ियों की फिटनेस टेस्ट पर सख्ती, ATS केंद्रों पर कैमरे की निगरानी में होगी जांच पटना में पूर्वज स्मृति समारोह का आयोजन: समाज को सशक्त बनाने के लिए पूर्वजों के आदर्शों को जीवन में उतारने का लिया संकल्प बिहार पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लूट की बाइक और अवैध हथियारों के साथ 3 शातिर अपराधी गिरफ्तार पंचायत चुनाव 2026 को लेकर बिहार के मंत्री ने दिया बड़ा अपडेट, जानिए.. क्या बोले दीपक प्रकाश?
13-Dec-2025 09:46 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि राजधानी पटना सहित राज्य के सात प्रमुख शहरों की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई है। इन शहरों का औसत AQI 200 से 300 के दायरे में दर्ज किया गया है, जिससे वे ऑरेंज जोन में शामिल हो गए हैं। इससे न केवल शहरी इलाकों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सांस लेना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि सूखी सड़कें और वाहनों से उड़ती धूल पूरे राज्य को प्रभावित कर रही है।
पटना में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां कुछ इलाकों जैसे वेटनरी मैदान में AQI 343 तक पहुंच गया, यह बेहद खराब कैटेगरी में आता है। अन्य क्षेत्रों में सचिवालय 253, दानापुर 202 और तारामंडल 254 रहा, जबकि पटना सिटी अपेक्षाकृत बेहतर 90 पर था। इसी तरह आरा में 266, बिहारशरीफ 261, हाजीपुर 229, राजगीर 261 और समस्तीपुर 258 AQI दर्ज हुआ। मुख्य प्रदूषक PM2.5 और PM10 कण हैं, जिनका स्तर मानकों से कई गुना अधिक है। निर्माण कार्य, वाहनों की धूल और मौसमी कारक इसे और भी बढ़ा रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे स्तर पर आंखों में जलन, सांस की तकलीफ और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। फेफड़े या हृदय रोगी, बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। उन्हें बाहर निकलते समय मास्क पहनने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। इधर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर भी सवाल उठ रहे हैं, एंटी-स्मॉग मशीनों का इस्तेमाल प्रभावी नहीं माना जा रहा। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि पानी का छिड़काव रीडिंग को प्रभावित नहीं करता है।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है, सड़कों की नियमित सफाई, निर्माण स्थलों पर नियंत्रण और वाहन उत्सर्जन जांच बेहद जरुरी है। जब तक ये उपाय नहीं होते, बिहारवासियों को अपनी सेहत का खुद खयाल रखना होगा। यह समस्या अब दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिहार के शहरों और गांवों को भी अपनी चपेट में ले रही है।