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03-Dec-2025 08:34 AM
By First Bihar
Bihar industry : बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राज्य में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने का काम तेज हो गया है। मंगलवार को उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने उद्योग निदेशालय में आयोजित समीक्षा बैठक में राज्य में हुए निवेश प्रस्तावों पर हुए एमओयू (MoU) की पूरी जानकारी मांगी। बैठक में मंत्री ने कहा कि यह आवश्यक है कि सभी निवेशकों के आवेदन में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो और निवेश प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
मंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की जाए ताकि सभी विभाग समय पर अपना फीडबैक दें और निवेशकों को वास्तविक वन-स्टॉप क्लियरेंस अनुभव मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग विभाग के पोर्टल को इस तरह से सुदृढ़ किया जाए कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी और तेज हों।
बैठक में उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता ने सबसे पहले एसआईपीबी (State Investment Promotion Board) और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद राज्य की औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहन पैकेज की समीक्षा की गई। इसमें 2016 की औद्योगिक नीति, 2025 का बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज, टेक्सटाइल एवं लेदर नीति, एथनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति और लॉजिस्टिक नीति की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई।
मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में निवेशकों के लिए सुविधाजनक और तेज प्रक्रिया लागू करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि निवेशक जब बिहार आएं, तो उन्हें कहीं भी बाधा या देरी का सामना न करना पड़े। इसके लिए विभागों को भी हर प्रस्ताव पर समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी।
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में उद्योग और निवेश के क्षेत्र में काफी सक्रियता रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए सरकार में शाहनवाज हुसैन को उद्योग मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में उद्योग विभाग ने पेशेवर तरीके से निवेशकों को बिहार में निवेश के लिए आकर्षित करना शुरू किया। इस दौरान लगभग 39,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव राज्य में आए।
इसके बाद 2022 में महागठबंधन सरकार में समीर महासेठ उद्योग मंत्री बने। उनके कार्यकाल में तेजतर्रार आईएएस अफसर संदीप पौंड्रिक ने बिहार इनवेस्टर कनेक्ट का आयोजन किया। इस सम्मेलन में अदानी ग्रुप समेत अन्य बड़ी कंपनियों ने 50,530 करोड़ रुपये के एमओयू पर साइन किए। यह आयोजन राज्य में निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
2024 में जब नीतीश कुमार ने फिर से एनडीए में लौटकर सरकार बनाई, तो नीतीश मिश्रा को उद्योग मंत्री नियुक्त किया गया। नीतीश मिश्रा ने उद्योग विभाग को एक सीईओ की तरह संचालित किया और उनके कार्यकाल में आयोजित निवेशक सम्मेलन में रिकॉर्ड 1.81 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर साइन हुए। यह बिहार के निवेश इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश सम्मेलन माना जा रहा है।
वर्तमान में उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस पर जोर दिया है कि सभी पुराने और नए एमओयू की स्थिति का पूर्ण विवरण तैयार किया जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि निवेशक किसी प्रकार की देरी या कठिनाई का सामना न करें, मंत्रालय ने स्पष्ट समय सीमा और प्रभावी पोर्टल संचालन पर विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है।
राज्य सरकार का यह प्रयास सिर्फ निवेश लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाकर बिहार को उद्योग मित्र राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मंत्री ने कहा कि सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा ताकि निवेशकों को बिहार में निवेश करना आसान और सुविधाजनक लगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में पिछले वर्षों में निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। राज्य की औद्योगिक नीतियां, प्रोत्साहन पैकेज और वन-स्टॉप क्लियरेंस प्रणाली ने इसे और अधिक आकर्षक बनाया है। नए निवेशक केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास में भी योगदान कर रहे हैं।
इस तरह, नई सरकार ने निवेशकों के लिए स्पष्ट दिशा और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित कर बिहार को निवेश के लिहाज से प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मंत्री डॉ. जायसवाल का यह कदम राज्य के उद्योग और आर्थिक विकास की रणनीति को और मजबूत करेगा।