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04-Dec-2025 08:28 AM
By First Bihar
bihar land : बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने और निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करने के उद्देश्य से राज्य सरकार तेजी से कदम उठाने में जुटी है। इसी कड़ी में राज्य के उपमुख्यमंत्री सह भू-राजस्व मंत्री विजय सिन्हा ने एक अहम बयान देते हुए स्पष्ट कहा कि बिहार में निवेशकों को किसी भी तरह की जमीन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सरकार हर जिले में निवेशकों के लिए विशेष रूप से चिन्हित भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल कर रही है।
विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार चाहती है कि देश-विदेश के निवेशक राज्य में आएं। इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत जमीन की उपलब्धता की होती है। इसलिए सरकार ने हर जिले में जमीन की पहचान की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि “बिहार के प्रत्येक जिले में निवेश के लिए लैंड बैंक तैयार किया जा रहा है। भूमि संबंधित समस्याओं का निराकरण सरकार की प्राथमिकता में है।”
सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायतें गंभीर, सरकार कर रही जांच
उपमुख्यमंत्री ने इस दौरान यह भी स्वीकार किया कि कई जिलों से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है और हर मामले की गहन जांच कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर यह देखा गया है कि सरकारी जमीनों पर वर्षों से अवैध कब्जा बना हुआ है, जिससे विकास परियोजनाओं और निवेश प्रक्रिया में बाधा आती है। राज्य सरकार ने ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी का आदेश जारी किया है और जहां भी अतिक्रमण की जानकारी मिल रही है, वहां तत्काल जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया जा रहा है।
विजय सिन्हा के अनुसार, जमीन पर कब्जा केवल आम लोगों द्वारा ही नहीं होता बल्कि कई बार प्रशासनिक लापरवाही के कारण भी ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए सरकार न सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही है बल्कि यह भी जांच कर रही है कि किन अधिकारियों की वजह से अतिक्रमण पनपने का मौका मिला।
उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अतिक्रमण को बढ़ावा देने या उसे रोकने में विफल रहने वाले संबंधित अधिकारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि “अतिक्रमण केवल लोगों की गलती नहीं, बल्कि कई स्थानों पर अधिकारियों की उदासीनता भी इसके लिए जिम्मेदार है। ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो उनसे आर्थिक वसूली भी की जाएगी.”
अतिक्रमण हटाने के लिए फिलहाल अदालत के आदेशों के तहत अभियान चलाया जा रहा है। कई जिलों में व्यापक पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा चुका है, जबकि कई जगहों पर यह प्रक्रिया चल रही है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सरकारी जमीन पूरी तरह सुरक्षित हो और भविष्य में उस पर दोबारा किसी प्रकार का अवैध कब्जा न हो सके।
निवेशकों के लिए जमीन उपलब्ध कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता
बिहार सरकार का मानना है कि यदि निवेशकों को जमीन आसानी से उपलब्ध हो जाए तो राज्य में उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उपमुख्यमंत्री का कहना है कि लैंड बैंक बनने के बाद निवेश प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल जमीन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि निवेशकों को अनुकूल वातावरण देना भी है। इसके लिए भूमि विवादों को समाप्त करने, अतिक्रमण हटाने, और जमीन की स्वच्छ एवं स्पष्ट उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।