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Bihar jail reform : बिहार के कैदियों का बनेगा ई-श्रम कार्ड, कारा सुधार समिति ने किया कई बदलावों का ऐलान

Bihar jail reform : बिहार की जेल व्यवस्था में बड़े सुधार की शुरुआत होने जा रही है। राज्य विधानसभा की कारा सुधार समिति ने हाल ही में फैसला किया है कि सभी कैदियों के लिए ई-श्रम कार्ड बनाए जाएंगे।

Bihar jail reform : बिहार के कैदियों का बनेगा ई-श्रम कार्ड, कारा सुधार समिति ने किया कई बदलावों का ऐलान

16-Dec-2025 10:38 AM

By First Bihar

Bihar jail reform : बिहार की जेलों में सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का ऐलान किया है। राज्य की विधानसभा की कारा सुधार समिति के सदस्य और बाढ़ से भाजपा विधायक डॉ. सियाराम सिंह ने हाल ही में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि राज्य की सभी जेलों में बंदियों के लिए ई-श्रम कार्ड बनाए जाएंगे। यह पहल बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से की जा रही है।


डॉ. सियाराम सिंह ने कहा कि जेलों का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं बल्कि बंदियों के मानसिक और सामाजिक सुधार को सुनिश्चित करना भी है। इस दिशा में उठाए गए कदमों में प्रत्येक जेल में मनोचिकित्सक की तैनाती शामिल है। इसका मकसद बंदियों की आपराधिक मानसिकता में सुधार लाना और उन्हें समाज के लिए उपयोगी बनाना है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में जेलों के खान-पान, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।


साथ ही विधानसभा कारा सुधार समिति ने निर्णय लिया है कि अब हर महीने जेलों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि जेलें केवल सजा का स्थान न रहकर सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनें। समिति की यह पहल यह सुनिश्चित करेगी कि जेलों में बंदियों के जीवन स्तर में सुधार हो और वे जेल से बाहर निकलने के बाद समाज में सक्रिय रूप से योगदान दे सकें।


ई-श्रम कार्ड की योजना से बंदियों को रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित होगी। यह कार्ड उन्हें विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्र की योजनाओं का लाभ लेने में मदद करेगा। यह पहल बिहार में बंदियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। इसके माध्यम से राज्य सरकार यह संदेश देना चाहती है कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने का स्थान नहीं है, बल्कि यह सुधार और पुनर्वास का केंद्र भी है।


कारा सुधार समिति की बैठक में यह भी चर्चा की गई कि हर जेल में एक प्रशिक्षित मनोचिकित्सक की तैनाती की जाएगी। मनोचिकित्सक बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी करेंगे और उन्हें आपराधिक प्रवृत्ति से दूर रखने में सहायता प्रदान करेंगे। इसके अलावा, समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि जेलों में बंदियों के खान-पान की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा और स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।


विधानसभा अध्यक्ष द्वारा गठित कारा सुधार समिति में कुल 15 सदस्य शामिल हैं। समिति की अध्यक्षता निशा सिंह कर रही हैं। इसके अलावा समिति के अन्य सदस्य हैं: लाल बाबू प्रसाद गुप्ता, ललित नारायण मंडल, प्रमोद कुमार सिन्हा, कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया, कविता देवी, विनय कुमार चौधरी, सियाराम सिंह, नागेंद्र राउत, रंजन कुमार, शंकर प्रसाद, सुभाष सिंह, राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह, अभिषेक आनंद और राहुल कुमार सिंह। समिति का कार्यकाल 31 मार्च 2026 तक निर्धारित किया गया है।


समिति के सदस्यों ने बताया कि उनका उद्देश्य जेलों में बंदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि जेल से बाहर आने के बाद बंदियों को समाज में सम्मानजनक स्थान मिले। समिति का मानना है कि बंदियों के पुनर्वास से समाज में अपराध दर में कमी आएगी और एक स्वस्थ समाज की स्थापना में मदद मिलेगी।


विधानसभा कारा सुधार समिति की यह पहल राज्य की जेल व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-श्रम कार्ड के माध्यम से बंदियों को मिलने वाले रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अवसर उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज करेंगे। इसके अलावा, मनोचिकित्सक की उपस्थिति से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान होगा और आपराधिक प्रवृत्ति वाले बंदियों में सुधार लाने में मदद मिलेगी।


समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि जेलों में नियमित निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं में सुधार सुनिश्चित किया जाएगा। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जेलों की स्थिति का आकलन किया जाएगा और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जेलें सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनें और बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए।


डॉ. सियाराम सिंह ने कहा कि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य जेलों को सिर्फ सजा देने का स्थान न बनाकर एक ऐसा केंद्र बनाना है, जहां बंदियों का मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास हो। इससे न केवल बंदियों को फायदा होगा बल्कि समाज में अपराध की घटनाओं में भी कमी आएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार बंदियों के लिए अन्य योजनाओं पर भी विचार कर रही है, जिससे उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त हो।


इस पहल के बाद बिहार की जेल व्यवस्था में व्यापक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। ई-श्रम कार्ड, मनोचिकित्सक की तैनाती, खान-पान और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, तथा नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाओं के जरिए राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि जेलें अपराधियों को सुधारने और उन्हें समाज के मुख्यधारा में शामिल करने का महत्वपूर्ण केंद्र बनें।


बिहार में कारा सुधार समिति के सदस्य और संबंधित अधिकारी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं और जल्द ही राज्य की सभी जेलों में इन सुधारों के परिणाम दिखने की संभावना है। यह पहल जेल सुधार और बंदियों के सामाजिक पुनर्वास के लिए एक नई राह खोलने वाली है।