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04-Jan-2026 11:25 AM
By First Bihar
Bihar government schools : बिहार के सरकारी स्कूल अब शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के सर्वांगीण विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहे हैं। पटना जिले में छात्राओं को आत्मरक्षा और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है, जबकि मसौढ़ी प्रखंड के स्कूलों में संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू हुई है। इन पहलों का उद्देश्य बच्चों को न केवल पढ़ाई में सक्षम बनाना है, बल्कि उन्हें जीवन में आत्मनिर्भर और रचनात्मक बनाने की दिशा में भी तैयार करना है।
छात्राएं बनेंगी मास्टर ट्रेनर
पटना जिले के सरकारी स्कूलों में अब छात्राओं को मार्शल आर्ट और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी उनकी ही साथी छात्राओं को सौंपी गई है। इन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। ये छात्राएं अपने स्कूलों के साथ-साथ प्रखंड के अन्य सरकारी स्कूलों में भी सप्ताह में एक दिन कराटे और अन्य मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देंगी। जिन स्कूलों में मास्टर ट्रेनर उपलब्ध हैं, वहां प्रधानाध्यापक अपनी सुविधा के अनुसार प्रशिक्षण का दिन और समय तय करेंगे।
321 मास्टर ट्रेनर, विस्तार की तैयारी
पटना जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को अब तक मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिनमें से 321 छात्राएं मास्टर ट्रेनर बन चुकी हैं। दूसरे चरण में इन विद्यालयों की अन्य छात्राओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। योजना का लक्ष्य अधिक से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा में दक्ष बनाना और उन्हें जरूरत पड़ने पर खुद की सुरक्षा करने में सक्षम बनाना है।
अब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के बाद हाई स्कूलों की छात्राओं को भी इस दायरे में लाया गया है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना के तहत पटना जिले के 325 हाई स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह प्रशिक्षण 36 दिनों का होगा, जिसमें हर सत्र दो घंटे का रहेगा।
सफेद से ब्लैक बेल्ट तक का सफर
छात्राओं को मार्शल आर्ट के विभिन्न स्तरों के अनुसार बेल्ट दी जाएगी। शुरुआत सफेद बेल्ट से होगी और सभी चरण पूरे करने के बाद छात्राएं ब्लैक बेल्ट हासिल करेंगी। प्रशिक्षण के अलग-अलग स्तरों पर पीला, नारंगी, हरा, नीला और भूरा बेल्ट भी प्रदान किए जाएंगे। पहले चरण में लगभग 1,300 छात्राओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है, जबकि आगे चलकर करीब 15 हजार छात्राओं तक इस प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाया जाएगा।
मसौढ़ी के स्कूलों में संगीत शिक्षा
मसौढ़ी प्रखंड के सरकारी स्कूलों में संगीत शिक्षा को लेकर नई शुरुआत की गई है। अब बच्चे रिकॉर्डेड गानों के बजाय खुद वाद्य यंत्र बजाकर चेतना सत्र में भाग लेंगे। प्राइमरी, मिडिल और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में म्यूजिक डेस्क बनाए जा रहे हैं। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से प्रत्येक स्कूल को हारमोनियम, तबला, नाल, कैसियो, टफली, झाल, मंजिरा, वासुरी और घुंघरू सेट उपलब्ध कराए गए हैं। बच्चों को गाने के साथ-साथ इन वाद्य यंत्रों को बजाने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। विशेष रूप से पारंपरिक गीतों और बिहारी लोक संगीत पर जोर दिया जाएगा।
शिक्षा से आगे आत्मविश्वास
शिक्षा विभाग का मानना है कि आत्मरक्षा और संगीत जैसी गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। ये पहलकदमी छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाएंगी और उन्हें अपनी प्रतिभा को पहचानने और निखारने का अवसर देंगी। सरकारी स्कूलों में इस तरह के बदलाव शिक्षा को केवल परीक्षा तक सीमित न रखते हुए जीवन कौशल से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
पटना और मसौढ़ी में शुरू की गई ये पहलकदमियां यह संदेश देती हैं कि बिहार में शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह बच्चों को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और रचनात्मक बनाने का माध्यम भी बनेगी। इससे छात्राएं न केवल शारीरिक रूप से मजबूत होंगी बल्कि मानसिक और सांस्कृतिक रूप से भी विकसित होंगी।