ब्रेकिंग न्यूज़

Bihar Sports Budget 2026: विश्व स्तरीय खेलों का केंद्र बनेगा बिहार, पंचायत स्तर पर खेल क्लबों का होगा गठन, नीतीश सरकार का बड़ा लक्ष्य Bihar Sports Budget 2026: विश्व स्तरीय खेलों का केंद्र बनेगा बिहार, पंचायत स्तर पर खेल क्लबों का होगा गठन, नीतीश सरकार का बड़ा लक्ष्य Bihar Budget 2026: बिहार के बजट पर आया लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य का रिएक्शन, जानिए.. क्या बोलीं? Bihar Budget 2026: बिहार के बजट पर आया लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य का रिएक्शन, जानिए.. क्या बोलीं? Bihar expressway projects : बिहार में 5 नए एक्सप्रेसवे और डबल डेकर फ्लाईओवर सहित सड़क निर्माण की नई सुविधाएँ; जानिए बजट की ख़ास बातें पुजारी हत्याकांड! में बड़ा फैसला, दो महिला समेत 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती: 52 हजार ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन/रद्द करने का निर्देश Bihar Budget 2026-27: दिल्ली मुंबई के बाद अब देश के इस राज्यों में बनेगा बिहार भवन, बजट भाषण में सरकार का एलान; जानिए ख़ास बातें Bihar Budget 2026-27 : जानिए बिहार बजट में किस विभाग को मिला कितना पैसा, कौन रहा सबसे आगे तो कौन पीछे Bihar Budget 2026-27 : बिहार के विकास और सामाजिक कल्याण के लिए 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश; रोजगार -नौकरी समेत इन चीजों पर होगा अधिक फोकस

Bihar ex-MLA pension : बिहार के पूर्व विधायकों की पेंशन IAS वेतन से दोगुनी, इन नेताओं को मिल रहा है 1.73 लाख रुपए मासिक

बिहार के पूर्व विधायकों और मंत्रियों की पेंशन अब नए IAS अधिकारियों के वेतन से भी ज्यादा है। कुछ को 1.73 लाख रुपए मासिक पेंशन मिलती है, साथ ही मुफ्त इलाज और यात्रा सुविधाएं भी।

Bihar ex-MLA pension : बिहार के पूर्व विधायकों की पेंशन IAS वेतन से दोगुनी, इन नेताओं को मिल रहा है 1.73 लाख रुपए मासिक

10-Dec-2025 09:33 AM

By First Bihar

बिहार में पूर्व विधायकों और विधान पार्षदों की पेंशन आज के समय में कई नई आईएएस अधिकारियों के वेतन से भी अधिक हो गई है। उदाहरण के लिए, भाजपा के 7 बार विधायक रहे नंदकिशोर यादव को अब 1.73 लाख रुपए मासिक पेंशन मिल रही है। वहीं, कांग्रेस के अवधेश कुमार सिंह चुनाव हारने के बाद भी 1.41 लाख रुपए मासिक पेंशन पा रहे हैं। यह स्थिति केवल दो नेताओं तक सीमित नहीं है; बिहार में कई पूर्व विधायकों की पेंशन बड़े अधिकारियों के वेतन से कहीं अधिक है।


बिहार विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों का वेतन केवल 50 हजार रुपए मासिक है। इसके अलावा उन्हें अन्य सुविधाओं के लिए अलग राशि मिलती है। यदि कोई विधायक लगातार चुनाव जीतते हैं, तो उन्हें सैलरी मिलती है, लेकिन पेंशन नहीं। चुनाव हारने या न लड़ने पर वे सदन के सदस्य नहीं रहते और इस स्थिति में वे पेंशन के हकदार बन जाते हैं।


पूर्व विधायकों की पेंशन का नियम तय है। पहले साल उन्हें 45 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है। इसके बाद हर साल 4 हजार रुपए जोड़े जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक टर्म यानी 5 साल विधायक रहने पर पेंशन 61 हजार रुपए (45,000+16,000) होती है। दो टर्म (10 साल) पर 81 हजार रुपए, तीन टर्म (15 साल) पर 1.01 लाख रुपए, और चार टर्म (20 साल) पर 1.21 लाख रुपए मासिक पेंशन मिलती है। विधायक और विधान परिषद सदस्य दोनों पर यह नियम समान रूप से लागू होता है।


बिहार में सबसे अधिक पेंशन पाने वाले पूर्व विधायक सत्यदेव नारायण आर्य हैं। 33 साल तक विधायक रहने के कारण उन्हें 1.73 लाख रुपए मासिक पेंशन मिल रही है। वहीं, महिलाओं में सबसे अधिक पेंशन पूर्व विधायक बीमा भारती को मिल रही है। उन्होंने 23 साल तक विधायक के रूप में सेवा की और उन्हें 1.33 लाख रुपए मासिक पेंशन मिलती है। इसके मुकाबले एक नए IAS अधिकारी का शुरुआती वेतन 84 हजार रुपए होता है, जबकि कई पूर्व विधायकों की पेंशन इससे दोगुना है।


अन्य उदाहरणों में जगदीश शर्मा, जो केवल 1 साल विधायक रहे, उन्हें 1.65 लाख रुपए पेंशन मिल रही है। 28 साल तक विधायक रहे रामेश्वर को 1.53 लाख रुपए, 25 साल तक विधायक रहे अवधेश कुमार सिंह को 1.41 लाख रुपए, और 24 साल तक विधायक रहे जगदानंद सिंह को 1.37 लाख रुपए पेंशन मिलती है।


पेंशन के अलावा पूर्व और वर्तमान विधायकों को सरकारी खर्च पर यात्रा का भी लाभ मिलता है। पूर्व विधायकों को 2 लाख रुपए का फ्लाइट या ट्रेन कूपन हर साल मिलता है, साथ में तीन लोग यात्रा कर सकते हैं। वर्तमान विधायकों को 4 लाख रुपए तक का कूपन मिलता है।


साथ ही, सभी पूर्व और वर्तमान विधायकों तथा उनके जीवनसाथियों को मुफ्त इलाज की सुविधा भी है। इलाज का खर्च CGHS (Central Government Health Scheme) रेट पर सरकार चुकाती है। यदि विधायक का निधन हो जाता है, तो उनके परिवार को पेंशन की 75 फीसदी राशि दी जाती है। CGHS रेट केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए तय किए गए मेडिकल खर्च की दर है, जो अस्पताल और सरकार के बीच निर्धारित होती है।


इस प्रकार, बिहार के पूर्व विधायकों और विधान पार्षदों की पेंशन और अन्य सुविधाएं कई बार नए उच्च अधिकारियों के वेतन से भी अधिक हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि माननीयों के लिए सरकार ने विशेष आर्थिक सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित की हैं।