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02-Jan-2026 10:09 AM
By First Bihar
Bihar healthcare : बिहार और देश के अन्य राज्यों में मरीजों की सुविधा और दवा संबंधी भ्रम को कम करने के उद्देश्य से नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब पटना समेत पूरे बिहार के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को मरीजों के पर्चे पर दवा के नाम स्पष्ट रूप से, बड़े और कैपिटल अक्षरों में लिखने का निर्देश दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि दवा के नाम को फार्मासिस्ट या स्वास्थ्य कर्मी आसानी से पढ़ सकें और किसी प्रकार की गलती या भ्रम की स्थिति न उत्पन्न हो।
एनएमसी के इस निर्देश के तहत अब डॉक्टर केवल जेनेरिक दवाओं का ही नाम पर्चे पर लिखेंगे। ब्रांडेड दवा का नाम लिखना पूर्णत: प्रतिबंधित होगा। आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी सरकारी संस्थान में डॉक्टर द्वारा ब्रांडेड दवा लिखे जाने की शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित अधिकारी द्वारा जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इससे मरीजों को दवा सस्ती और सही मात्रा में मिलने में आसानी होगी।
पटना एम्स, पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस समेत राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में यह आदेश तुरंत लागू होगा। साथ ही, यह निर्देश जल्द ही बिहार के जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी लागू करने की योजना है।
एनएमसी का यह आदेश पंजाब, हरियाणा और कुछ अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों के निर्देशों के बाद जारी किया गया है। आयोग ने कहा है कि डॉक्टरों की लिखावट साफ और पढ़ने योग्य होनी चाहिए। पर्चे पर दवाओं के नाम इस तरह लिखे जाएं कि फार्मासिस्ट या अन्य स्वास्थ्य कर्मी को उन्हें समझने में किसी तरह की परेशानी न हो। आड़ी-तिरछी या अस्पष्ट लिखावट को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि डॉक्टर केवल जेनेरिक दवा का नाम लिखेंगे। जेनेरिक दवा वह होती है जो किसी ब्रांडेड दवा की तरह कार्य करती है, लेकिन कीमत में सस्ती होती है। इससे मरीजों की आर्थिक भार कम होगा और वे उचित मूल्य पर दवा प्राप्त कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्देश से मरीजों को दवा लेने में सुविधा तो होगी ही, साथ ही दवा की गलत डोज़, भ्रम और दवा की पहचान में होने वाली गलतियों की संभावना भी कम होगी। फार्मासिस्टों को अब दवा की पहचान करने में समय की बचत होगी और दवा वितरण प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी।
एनएमसी ने यह भी निर्देश दिया है कि डॉक्टरों को अपनी लिखावट में सुधार लाने के लिए प्रशिक्षण या आवश्यक निर्देशों का पालन करना होगा। अगर किसी डॉक्टर की लिखावट अस्पष्ट पाई जाती है या उन्होंने पर्चे पर ब्रांडेड दवा का नाम लिखा तो इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस दिशा में सभी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।
सरकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम मरीजों और स्वास्थ्य प्रणाली दोनों के लिए लाभकारी है। इससे मरीजों को दवा के सही नाम की जानकारी मिलेगी और उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, मरीज को जेनेरिक दवा उपलब्ध होने से उनके खर्च में भी कमी आएगी।
इस आदेश के तहत फार्मासिस्ट और अस्पताल के अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी जिम्मेदार होंगे कि वे पर्चे में लिखी गई दवा को सही पहचानें और वितरण करें। यदि किसी दवा की गलत पहचान या वितरण में त्रुटि होती है, तो संबंधित अधिकारी द्वारा तत्काल जांच और कार्रवाई की जाएगी।
नेशनल मेडिकल कमिशन का यह कदम स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, दवा वितरण में त्रुटियों को रोकने और मरीजों की सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। बिहार सहित पूरे देश में इसे लागू करने के बाद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
इस तरह, नेशनल मेडिकल कमिशन के इस निर्देश से न केवल डॉक्टरों की जिम्मेदारी बढ़ेगी बल्कि मरीजों को सस्ती, सुरक्षित और सही दवा प्राप्त करने में भी आसानी होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह कदम पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाएगा और मरीजों के लिए एक भरोसेमंद और पारदर्शी दवा वितरण प्रणाली सुनिश्चित करेगा।