BIHAR: दो बाइक की सीधी टक्कर में वकील की मौत, घायल युवक DMCH रेफर मुंगेर में अवैध गिट्टी और बालू ढुलाई पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई, 5 गिरफ्तार, 47 लाख का जुर्माना NEET छात्रा हत्याकांड!: जहानाबाद में 25 KM लंबा मार्च, सरकार पर लीपापोती का आरोप BIHAR: रंगदारी मामले में निलंबित थानाध्यक्ष अमरज्योति ने किया सरेंडर, कोर्ट ने भेजा जेल पटना में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: तीन कॉल सेंटरों पर रेड, 22 गिरफ्तार फ्लैट खरीदारों के हित पर जोर: रेरा बिहार कार्यक्रम में न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह का मार्गदर्शन बिहार में अवैध खनन पर सरकार सख्त: सारण में कई वाहन जब्त, 75.65 लाख का जुर्माना राशनकार्ड धारकों को बड़ी राहत: होली और दिवाली पर मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर Bihar News: जनगणना को लेकर नीतीश सरकार ने शुरू की तैयारी, समन्वय समिति की हुई बैठक; पूछे जाएंगे आपसे 33 सवाल Bihar News: जनगणना को लेकर नीतीश सरकार ने शुरू की तैयारी, समन्वय समिति की हुई बैठक; पूछे जाएंगे आपसे 33 सवाल
04-Oct-2025 07:36 AM
By Dhiraj Kumar Singh
Bihar News: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मुख्यमंत्री लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को जमुई के बटिया में प्रस्तावित मुख्यमंत्री का जनसंवाद कार्यक्रम और बहुप्रतीक्षित बरनार जलाशय परियोजना का शिलान्यास होना था। लेकिन अंतिम समय पर यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। जिलाधिकारी नवीन ने पुष्टि की कि खराब मौसम की वजह से मुख्यमंत्री का दौरा संभव नहीं हो पाया।
दरअसल, बरनार जलाशय परियोजना को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से उत्सुकता रही है। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री के हाथों शिलान्यास से किसानों और ग्रामीणों की दशकों पुरानी समस्या का समाधान निकल सकेगा। यह परियोजना न केवल सिंचाई बल्कि पेयजल संकट को भी दूर करने में अहम साबित हो सकती है।
वहीं, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए प्रशासन और स्थानीय नेताओं की ओर से बड़ी तैयारियां की गई थीं। हजारों लोगों के जुटने की संभावना थी और ग्रामीण बड़ी उम्मीदों के साथ कार्यक्रम का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अचानक कार्यक्रम रद्द होने से भीड़ निराश हो गई।
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के इस दौरे की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी। ग्रामीण अब नई तारीख की घोषणा पर निगाहें लगाए हुए हैं। बरनार जलाशय परियोजना लगभग 50 साल से लंबित है। यह मुद्दा हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उठता रहा है। नेताओं ने हर बार इसके शीघ्र पूरा होने का वादा किया, लेकिन अब तक यह साकार नहीं हो सका।
परियोजना अधूरी रहने का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। आसपास के खेतों में सिंचाई की सुविधा न होने से हजारों एकड़ भूमि पर फसलें सूख जाती हैं। किसान मजबूरी में महंगे डीजल पंप और ट्यूबवेल का सहारा लेते हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है और मुनाफा घट जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बरनार जलाशय परियोजना पूरी हो जाती है तो क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा, पेयजल संकट दूर होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। यही वजह है कि ग्रामीण इसे अपने इलाके की जीवनरेखा परियोजना मानते हैं।