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25-Nov-2025 11:51 AM
By First Bihar
Bihar Cabinet Decision : बिहार सरकार ने राज्य के प्रमुख शहरों में तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या, बढ़ते दबाव और आधुनिक शहरी आवश्यकताओं को देखते हुए एक बड़े फैसले पर मुहर लगा दी है। अब राज्य में मास्टर प्लान आधारित, नियोजित, पर्यावरण–संतुलित और आधुनिक शहरी ढांचा विकसित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 11 प्रमुख शहरों और 9 प्रमंडलीय मुख्यालय शहरों में सैटलाइट टाउनशिप और ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। साथ ही सोनपुर, सीतामढ़ी और सीतारामपुर में टाउनशिप विकास के प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार करने की भी स्वीकृति दे दी गई है।
यह पहल राज्य में तेजी से होते अनियंत्रित शहरी विस्तार को रोकने और शहरों के भविष्य के विकास को एक नियोजित दिशा देने के उद्देश्य से की गई है। व्यापक परिवेश में देखा जाए तो पिछले एक दशक में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर समेत कई शहरों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है। लोगों के पलायन, रोज़गार की तलाश और शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच के कारण शहरों पर जनसंख्या का भारी दबाव बढ़ा है। इस स्थिति ने अव्यवस्थित निर्माण, यातायात जाम, सीवरेज समस्या, हरित क्षेत्र में कमी और शहरी प्रदूषण जैसी चुनौतियों को जन्म दिया है। सरकार का मानना है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इन समस्याओं का समाधान अत्यंत कठिन हो जाएगा।
इसी दृष्टिकोण से सरकार ने मास्टर प्लान आधारित विकास पर जोर दिया है। नए सैटलाइट टाउनशिप और ग्रीनफील्ड टाउनशिप पूरी तरह नियोजित होंगे, जहां सड़क नेटवर्क, जलापूर्ति, सीवरेज प्रबंधन, ठोस कचरा निपटान, ग्रीन ज़ोन, संस्थागत क्षेत्रों, आवासीय व व्यावसायिक उपयोग की स्पष्ट परिभाषा, यातायात व्यवस्था, उद्योगों के लिए स्थान और सार्वजनिक सुविधाओं की उपलब्धता को शुरुआत से ही व्यवस्थित रूप से शामिल किया जाएगा।
सोनपुर, सीतामढ़ी और सीतारामपुर को टाउनशिप विकास के लिए उपयुक्त मानते हुए सरकार ने इन क्षेत्रों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से सोनपुर, जो पटना का नजदीकी क्षेत्र है, राजधानी के बढ़ते दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यहां विकसित होने वाली टाउनशिप ग्रेटर पटना के कंसेप्ट को मजबूत करेगी। वहीं, सीतामढ़ी और सीतारामपुर उत्तर बिहार में समतुल्य शहरी विकास और क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करने में सहायक होंगे।
सरकार का उद्देश्य न केवल शहरीकरण को व्यवस्थित करना है, बल्कि आर्थिक विकास की नई संभावनाओं को भी बढ़ावा देना है। नियोजित टाउनशिप में निवेशकों, उद्यमियों और कंपनियों के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ग्रीनफील्ड टाउनशिप के माध्यम से राज्य में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं और शहरी सुविधाओं का विस्तार होगा।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। टाउनशिप के विकास में ग्रीन बेल्ट, वाटर बॉडी, वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा और आधुनिक कचरा प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि भविष्य के शहर न केवल आधुनिक हों, बल्कि पर्यावरण-संवेदनशील भी बने रहें।
सरकार का यह निर्णय बिहार की शहरी विकास रणनीति में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल प्रमुख शहरों के दबाव में कमी आएगी, बल्कि भविष्य में रहने योग्य, सुरक्षित, स्वच्छ, आधुनिक और संतुलित शहरों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में ये टाउनशिप बिहार के शहरी विकास का नया चेहरा बनेंगी और बिहार को पूर्वी भारत में उभरते शहरी मॉडल के रूप में स्थापित करेंगी।