1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Sun, 11 Jan 2026 01:49:19 PM IST
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Bihar News: बिहार ने मछली उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए देश में चौथा स्थान हासिल कर लिया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में कुल 9.59 लाख टन मछलियों का उत्पादन हुआ, जो डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की सतत पहलों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का परिणाम है। पिछले दस वर्षों में बिहार ने मछली उत्पादन में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो राज्य की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
वर्ष 2013-14 में बिहार मछली उत्पादन में देश में नौवें स्थान पर था। सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी सहयोग के चलते मत्स्यपालन को नया आयाम मिला। वर्ष 2023-24 में बिहार चौथे स्थान पर पहुंचा और 2024-25 में 9.59 लाख टन उत्पादन के साथ इस स्थिति को और मजबूत कर लिया। यह बदलाव दिखाता है कि राज्य ने परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक मत्स्यपालन की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
बिहार में 7,575.12 हेक्टेयर क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति से तालाबों का निर्माण कर तकनीकी आधारित मछली उत्पादन किया जा रहा है। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ मछलियों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। राज्य की भौगोलिक विविधताओं के अनुसार तकनीकों का इस्तेमाल कर मत्स्यपालकों को नई संभावनाएं दी गई हैं।
बायोफ्लॉक तकनीक ने बिहार में मछली उत्पादन की परिभाषा ही बदल दी है। इस तकनीक से कम स्थान और कम लागत में अधिक मछलियों का उत्पादन संभव हो रहा है। अब तक राज्य में 764 बायोफ्लॉक संरचनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग इस तकनीक के जरिए मत्स्यपालन को स्वरोजगार के रूप में अपना रहे हैं।
री-सर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम तकनीक से 90 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है और उच्च सघन मत्स्यपालन संभव हो रहा है। यह तकनीक खासकर उन क्षेत्रों में कारगर साबित हो रही है, जहां पानी की उपलब्धता सीमित है।
मछली उत्पादन में इस बढ़ोतरी से हजारों किसानों और युवाओं को रोजगार और आय का नया स्रोत मिला है। मत्स्यपालन अब केवल पारंपरिक पेशा नहीं रह गया, बल्कि एक संगठित और तकनीक आधारित उद्योग के रूप में उभर रहा है।
देश में चौथे स्थान पर पहुंचना बिहार के लिए उपलब्धि के साथ-साथ पहचान भी है, जो साबित करता है कि सही नीतियों, तकनीक और इच्छाशक्ति के माध्यम से राज्य कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।