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14-Dec-2025 08:08 AM
By First Bihar
Bihar Board : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) ने अपनी कार्यप्रणाली में गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता का नया मानक स्थापित करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बोर्ड को एक साथ तीन महत्वपूर्ण आईएसओ (अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन) प्रमाणपत्र प्रदान किए गए हैं। ये प्रमाणपत्र गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली के लिए मिले हैं। इसके साथ ही बिहार बोर्ड देश का पहला परीक्षा बोर्ड बन गया है, जिसे एक साथ तीनों श्रेणियों में आईएसओ सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी शनिवार को बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि बोर्ड की कार्यप्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने के लिए बीते कई वर्षों से लगातार सुधार और नवाचार किए जा रहे थे, जिसका परिणाम अब सामने आया है। आनंद किशोर ने कहा कि आईएसओ प्रमाणपत्र मिलना केवल सम्मान नहीं, बल्कि बोर्ड की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर मुहर है।
बिहार बोर्ड को जिन तीन श्रेणियों में आईएसओ प्रमाणपत्र मिले हैं, उनमें पहली है गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (ISO 9001:2015)। इसके तहत मैट्रिक और इंटर स्तर के विद्यालयों को मान्यता देने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाया गया है। परिणामों में अनावश्यक देरी खत्म हुई है और परीक्षाओं के संचालन में मानकीकृत प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया गया है।
दूसरी श्रेणी है सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (ISO/IEC 27001:2022)। इस क्षेत्र में बिहार बोर्ड ने आईटी और सॉफ्टवेयर के व्यापक उपयोग से परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया है। छात्रों के डेटा की सुरक्षा, ऑनलाइन परिणाम घोषणा और 11वीं कक्षा में नामांकन के लिए ओएफएस (ऑनलाइन फैसिलिटेशन फॉर स्टूडेंट्स) जैसी व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इसी कारण बिहार बोर्ड लगातार देश में सबसे पहले मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट जारी करने में सफल रहा है। अध्यक्ष आनंद किशोर के अनुसार, वर्ष 2019 से 2025 तक लगातार सात वर्षों से बिहार बोर्ड ने सबसे पहले परिणाम घोषित करने का रिकॉर्ड कायम रखा है।
तीसरी और अहम श्रेणी है रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली (ISO 15489-1:2016)। इसके अंतर्गत बिहार बोर्ड ने वर्ष 1983 से लेकर 2025 तक के सभी महत्वपूर्ण शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित कर दिया है। इससे न केवल पुराने दस्तावेजों को खोजना आसान हुआ है, बल्कि रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका भी खत्म हुई है।
आनंद किशोर ने कहा कि आईएसओ प्रमाणपत्र मिलने से बिहार बोर्ड की प्रतिष्ठा देशभर में और मजबूत होगी। छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा कि दाखिला, परीक्षा और परिणाम की पूरी प्रक्रिया गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ संपन्न होगी। साथ ही कर्मचारियों का मनोबल भी ऊंचा होगा और वे अधिक दक्षता के साथ कार्य कर सकेंगे।
गौरतलब है कि बिहार बोर्ड को इससे पहले वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री उत्कृष्ट लोक प्रशासन पुरस्कार भी मिल चुका है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि समिति न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि प्रशासनिक सुधारों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। आईएसओ प्रमाणपत्र मिलने के बाद यह उम्मीद और मजबूत हुई है कि बिहार बोर्ड आने वाले वर्षों में भी गुणवत्ता, पारदर्शिता और सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखेगा और अन्य बोर्डों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।