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16-Sep-2025 08:09 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार में विधानसभा चुनाव होने अब कुछ ही दिन शेष है। ऐसे में चुनाव से पहले SIR को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। अब बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव तिथि की घोषणा से पहले ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और मतदान केंद्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। निर्वाचन आयोग के निर्देश के तहत राज्य भर में अब हर जिले में मतदान के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान शुरू कर दी गई है।
बता दें कि इस कार्य की जिम्मेदारी गृह विभाग ने सभी जिलों के डीएम (जिलाधिकारी) और एसपी (पुलिस अधीक्षक) को सौंपी है। आयोग के आदेशानुसार, हर 10 से 12 मतदान केंद्रों को एक सेक्टर माना जाएगा, जिसके लिए एक सेक्टर पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। बिहार में इस बार 90,000 से अधिक मतदान केंद्र स्थापित होने हैं, जिस कारण करीब 9,000 सेक्टर पदाधिकारियों की तैनाती की जाएगी। ये सेक्टर पदाधिकारी स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल, आम नागरिकों और राजनीतिक दलों के सहयोग से "सेक्टर मैनेजमेंट प्लान" तैयार करेंगे, जिससे शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सके।
वहीं, सेक्टर पदाधिकारियों को उनके क्षेत्र में कमजोर और भेद्य इलाकों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई है। खासतौर से उन इलाकों को चिह्नित किया जाएगा जहां दबंगों या प्रभावशाली व्यक्तियों का असर मतदान पर पड़ सकता है। इस तरह से क्षेत्रों में मतदाताओं का विश्वास बहाल करने के लिए विशेष रणनीति बनाई जाएगी।
इसके अलावा, पिछले चुनावों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए उन स्थानों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां मतदान प्रतिशत कम रहा था। सेक्टर पदाधिकारी इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक मतदान सुनिश्चित करने के लिए बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और अन्य वंचित वर्गों के मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने के लिए विशेष योजना बनाएंगे।
मतदान तिथि से करीब एक सप्ताह पहले सभी सेक्टर पदाधिकारियों को सेक्टर मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी दे दी जाएगी। ये अधिकारी मतदान के दिन अपने क्षेत्र का लगातार भ्रमण करते रहेंगे और अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करेंगे।
वहीं, अगर किसी क्षेत्र में कानून व्यवस्था या मतदान प्रक्रिया से जुड़ी कोई समस्या दिखाई देती है, तो सेक्टर मजिस्ट्रेट को तुरंत जिला निर्वाचन पदाधिकारी और निर्वाची पदाधिकारी को सूचित करना होगा। इसके अलावा वे उड़नदस्ता दल के साथ मिलकर संवेदनशील इलाकों की निगरानी भी करेंगे और आवश्यक उपायों को अमल में लाएंगे।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य स्पष्ट है मतदान प्रतिशत बढ़ाना, मतदाताओं में विश्वास पैदा करना, और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष व शांतिपूर्ण बनाना। निर्वाचन आयोग और प्रशासन की यह तैयारी बताती है कि इस बार बिहार चुनाव में सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है।